बौद्ध धर्म जीवन जीने की एक कला व एक पद्धति है: भिक्षु सुमेधा थेरो
बौद्ध धर्म जीवन जीने की एक कला व एक पद्धति है: भिक्षु सुमेधा थेरो बौद्ध धर्म जीवन जीने की एक कला व एक पद्धति है: भिक्षु सुमेधा थेरो बौद्ध धर्म जीवन

बोकारो बुद्ध बिहार के तत्वावधान में सेक्टर 4 स्थित बुद्ध विहार के प्रांगण में 2570वां बुद्ध जयंती समारोह व बोकारो बुद्ध विहार का 50 वां वार्षिकोत्सव धुमधाम से मनाई गई। सबसे पहले बुद्ध मंदिर में श्री लंका से आये हुए भिक्षु सुमेधा थेरो के नेतृत्व में उपासक- उपासिकाओं , बौद्ध धर्म के अनुयायियों व अन्य धर्मावलंबियों के द्वारा पूजा अर्चना किया गया। काफी संख्या में लोगों ने पूजा- वंदना में भाग लिया। सबसे पहले त्रिशरण ,पंचशील व महा परित्राण का पाठ किया गया।
पूजा अर्चना और बुद्ध का संदेश
भिक्षु सुमेधा थेरो ने बौद्ध रीति से पूजा पाठ करवाकर बुद्ध का संदेश उपस्थित श्रद्धालुओं को दिए। उन्होंने कहा भगवान बुद्ध का संदेश मानव मानव एक समान है। सभी मानव एक ही है। उन्होंने कहा अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। संसार में वही सुखी है जिसने अहंकार, ईर्ष्या, वैर, कटुता, तृष्णा व स्वार्थ को जीत लिया है। दया, सत्य, अहिंसा, भाईचारा को जीवन में उतार लिया है। बौद्ध धर्म जीवन जीने की एक कला है , एक पद्धति है।
बुद्ध विहार की गतिविधियाँ
सचिव कालीपद रजक ने बुद्ध विहार के गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा बुद्ध का संदेश आज भी प्रासंगिक है। समारोह में नगीना प्रसाद महतो ने कहा भगवान बुद्ध द्वारा प्रतिपादित अष्टांगिक मार्ग आज भी काफी प्रासंगिक है। मौके पर रविन्द्र कुमार, आर पी वर्मा, सुरेश प्रसाद, राकेश, मंजू साह, वागेश्वर साह, शामो देवी, सुशीला देवी, रितु कुमारी, शौर्य रंजन, संजय गुप्ता, डॉ राजीव रंजन, बाला राम, सुरजीत कुमार, सीता राम महतो, राजदेव प्रसाद , बसंती देवी, फूलमंडी देवी, ललन चौधरी आदि शामिल रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


