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कई दशकों से सरला खुर्द में नहीं बनी पक्की सड़क

पेटरवार फोटो 01 सरला खुर्द का कच्ची सड़ककई दशकों से एक अदद पक्की सड़क का इंतजार है सरला खुर्द के ग्रामीणों को, 20 वर्ष पूर्व किया जा चुका है ग्रेड...

कई दशकों से सरला खुर्द में नहीं बनी पक्की सड़क
हिन्दुस्तान टीम,बोकारोMon, 27 May 2024 06:00 PM
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पेटरवार रुस्तम अंसारी। प्रखंड के कोह पंचायत के तहत पड़ने वाले सरला खुर्द के ग्रामीण कई दशकों से एक पक्की सड़क की आस लगाए बैठे है लेकिन कई दशक बीत जाने के बावजूद सरला खुर्द के ग्रामीणों को एक अदद पक्की सड़क नहीं मिल सकी। जिसके कारण ग्रामीण काफी आक्रोश में है और इसका खमियाजा आने वाले समय में जनप्रतिनिधि को भुगतना पड़ सकता है। गांव में पक्की सड़क नही होने के कारण गांव के लोगों को बरसात के समय में ग्रामीणों को आवागमन करने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके कारण ग्रामीण स्थानीय जनप्रतिनिधि से काफी नाराज है।
डेढ़ किलोमीटर लंबी है सड़क: सरला खुर्द मोड़ के मिटकू दुकान से लेकर नरेश महतो के घर तक कच्ची सड़क की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान दो सौ फीट पी सी सी पथ और प्रखंड स्तर से करीब तीन सौ फीट पी सी सी पथ का निर्माण कराया जा चुका है। वर्तमान समय में करीब एक किलोमीटर सड़क कच्ची है। 20 वर्ष पूर्व इस कच्ची सड़क पर ग्रेड वन का कार्य किया गया है लेकिन आगे का काम नही हो सका है जिसके चलते गांव के ग्रामीणों को बरसात के दिनों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन इस और अभी तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस और ध्यान नहीं दिया जिसके चलते ग्रामीणों को इसका खमियाजा दशकों से भुगतना पड़ रहा है।

40 घरों का है बस्ती: सरला खुर्द का यह बस्ती 40 घरों का है जिसमें पिछड़ा वर्ग और आदिवासी समाज के करीब डेढ़ सौ लोग निवास करते है लेकिन इन्हें अब तक आवागमन की सुविधा नहीं उपलब्ध हो पाई है। यह पथ सर्वे खतियान में दर्ज है उसके बावजूद इस ग्रामीण पथ का अब तक कायाकल्प नही किया जा सका है जिसके चलते ग्रामीणों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

क्या कहते है ग्रामीण: इस मामले पर सरला खुर्द के ग्रामीण संदीप कुमार महतो, गोबिंद महतो, रविंद्र कुमार महतो, देव नारायण महतो, शहबू राम बेदिया आदि ने कहा कि बीते बरसात के समय कच्ची सड़क का मिट्टी बह गया तो ग्रामीणों को आवागमन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था और बाद में ग्रामीणों ने आपस में चंदा इक्कठा कर कच्ची सड़क का जीर्णोद्धार करके आवागमन के लायक बनाया लेकिन हर बरसात में कच्ची सड़क का मिट्टी कट जाता है और सड़क पर बिछाई गई पत्थर बेनकाब हो जाते है जिससे आवागमन करने में काफी परेशानी होती है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।

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