
बिहार फतह के बाद अब बंगाल की तैयारी, झारखंड में भाजपा ने बना लिया प्लान
नए साल की शुरुआत के साथ ही पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। जानकार बताते हैं कि 2026 के मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संभव है। अब ज्यादा समय शेष नहीं है।
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बंपर जीत का पश्चिम बंगाल में भी भाजपाइयों ने जश्न मनाया और नारा लगाया कि... बिहार की जीत हमारी है, अब बंगाल की बारी है। बिहार में जीत से बने माहौल को भाजपा पश्चिम बंगाल में भी भुनाने की तैयारी में है। तैयारी का आलम यह है कि भाजपा ने बंगाल से सटे झारखंड के पड़ोसी जिलों के भाजपाइयों को भी मोर्चे पर लग जाने का निर्देश दिया है। धनबाद भाजपा को भी बंगाल चुनाव को लेकर कई दिशा निर्देश प्राप्त हुए हैं।
नए साल की शुरुआत के साथ ही पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। जानकार बताते हैं कि 2026 के मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संभव है। अब ज्यादा समय शेष नहीं है। भाजपा अभी से सक्रिय है। बिहार चुनाव की तर्ज पर बंगाल में भी झारखंड के भाजपाइयों को लगाया जाएगा। झारखंड के कोयलांचल एवं संतालपरगना से बंगाल की लंबी सीमाएं मिलती हैं। सिर्फ सीमाएं ही नहीं मिलती हैं, रोज का संपर्क भी है।
सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है। बात झारखंड के धनबाद-बोकारो की करें तो बंगाल के पश्चिम बर्धमान और पुरुलिया की सीमाएं मिलती हैं। इसी तरह संताल परगना से मालदा और वीरभूम जैसे पश्चिम बंगाल के बड़े जिलों की सीमा झारखंड से लगती हैं। इन जिलों की दर्जनों विधानसभा सीटों में झारखंड का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव है। भाजपा पड़ोसी सीटों पर झारखंड के भाजपाइयों को लगाने की तैयारी में है। पुरुलिया के भाजपा के कई जनप्रतिनिधि इसी सिलसिले में अभी हाल में धनबाद भी आए हुए थे।
धनबाद भाजपा महानगर की ओर से मिली जानकारी के अनुसार बंगाल चुनाव को लेकर कई स्तरों पर समिति गठित कर पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। मालूम हो कि धनबाद का बंगाल से काफी जुड़ाव है। लोगों को रोज आना-जाना करते हैं। सिर्फ पड़ोसी जिले ही नहीं राजधानी कोलकाता से धनबाद का रोज का कारोबारी संपर्क है। वहीं बड़ी संख्या में बंगाली झारखंड स्थिति कोयला कंपनियों में नौकरी करते हैं। राजनीतिक रूप से भी कोयलांचल में बंगाली सक्रिय हैं।
भाजपा की कवायद है कि इन्हीं संपर्कों का राजनीतिक उपयोग बंगाल विस चुनाव में किया जाए। जिस तरह बिहार विधानसभा चुनाव में सीमावर्ती जिले में झारखंड के भाजपाइयों को लगाया गया था, ठीक उसी तरह बंगाल विधानसभा चुनाव में भी झारखंड के संपर्कों का लाभ लिया जाए। मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में वीरभूम जैसे जिले में बड़ी संख्या में संताल मतदाता हैं।
भाजपा की योजना होगी कि झारखंड के संथाली नेताओं का उपयोग बंगाल में किया जाए। वैसे झारखंड मुक्ति मोर्चा का संथालों पर मजबूत पकड़ है। यदि टीएमसी को विधानसभा चुनाव में झामुमो का समर्थन मिलता है तो भाजपा के लिए चुनौती होगी। वैसे झामुमो भी पश्चिम बंगाल में संथाल बहुल कुछ विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ता रहा है।





