
झारखंड से एक व्यक्ति को फर्जी BARC वैज्ञानिक की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया
पुलिस ने सोमवार को बताया कि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के वैज्ञानिक होने का नाटक करने वाले एक दूसरे व्यक्ति की मदद करने के आरोप में 34 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
झारखंडे से एक व्यक्ति को फर्जी वैज्ञानिक की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के वैज्ञानिक होने का नाटक करने वाले एक दूसरे व्यक्ति की मदद करने के आरोप में 34 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान मुनाज़िल खान के रूप में हुई है।

पिछले हफ्ते, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद (60) को देश भर में घूमते हुए BARC वैज्ञानिक होने का झूठा दावा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि उसके पास से कुछ नक्शे और परमाणु हथियारों से संबंधित कथित डेटा जब्त किया गया है। हालांकि पुलिस द्वारा बताया गया कि अभी तक बरामद किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किया गया खान एक साइबर कैफे चलाता है। उसने कथित तौर पर अहमद को जाली एजुकेशनल सर्टिफिकेट बनाने में मदद की थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने दस्तावेज बनाते समय अपने डिजिटल फुटप्रिंट को छिपाने के लिए एडवांस्ड VPN का इस्तेमाल किया था। आगे की जांच की जा रही है कि इन लोगों अभी तक इस तरह के फर्जीवाड़े से किस तरह का कांड किया है।
भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थान है, जो मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित है। इसकी स्थापना 1954 में डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी। BARC परमाणु ऊर्जा, परमाणु रिएक्टर तकनीक, न्यूक्लियर साइंस, रेडिएशन टेक्नोलॉजी और स्पेस रिसर्च जैसे क्षेत्रों में शोध करता है।
यहां वैज्ञानिक ऊर्जा उत्पादन, रक्षा अनुसंधान और चिकित्सा क्षेत्र में रेडिएशन के उपयोग पर भी काम करते हैं। यह भारत की परमाणु क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



