झारखंड आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा, कल विधानसभा तक छात्रों का मार्च
झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच जेपीएससी के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। राज्य सरकार की सिफारिश राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

झारखंड में आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच हुई बातचीत के बाद एक और बड़ी कार्रवाई की गई है। झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। लोक भवन ने जानकारी देते हुए बताया है कि झारखंड लोक सेवा आयोग के सदस्य अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद के इस्तीफे को राज्य सरकार की सिफारिश पर स्वीकार कर लिया गया है।
वहीं दूसरी ओर सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ छात्रों की बातचीत के बाद कुछ मांगों पर सहमति बनी है लेकिन छात्रों ने साफ कह दिया है कि सीबीआई की जांच के आदेश के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा। इसी के साथ कल विधानसभा तक मार्च का ऐलान भी किया गया है।
सीआईडी-ईडी से कराएंगे जांच
उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद, झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, तीन दिनों की बातचीत और लंबी चर्चा के बाद, और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों पर अमल करते हुए, सरकार ने 14वीं GPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी गड़बड़ियों को दोतरफा तरीके से हल करने का फैसला किया है। आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी करेगी। इसके अलावा, गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत पाए जाने पर ईडी से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद, एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा और 90 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
मंत्री ने कहा, जरूरी सुधारों के लिए आईआईटी-आईएसएस, आईआईएम रांची और एक्सएलआईआई के एक्सपर्ट्स की एक समिति बनाई जाएगी। हालांकि उसमे भी उम्र छूट की बात नहीं मानी गई है। इन चर्चाओं के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने ,सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग की। सरकार ने साफ तौर पर कहा कि चूंकि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और अभी उनकी निगरानी में है - इसलिए उसे इसे रद्द करने का अधिकार नहीं है। सरकार ने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जांच की देखरेख करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया।
CGL परीक्षा रद्द करने से क्यों किया इनकार
उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि सरकार उठाए गए 98 प्रतिशत मुद्दों पर सहमत हो गई थी। बाकी दो प्रतिशत - खासकर सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि सरकार कोर्ट के आदेशों के तहत आयोजित परीक्षा को एकतरफा रूप से रद्द नहीं कर सकती, जिसके नतीजे घोषित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवार पहले से ही नौकरी कर रहे हैं।
सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, छात्रों में भरोसा जगाने के लिए, सरकार सीआईडी के काम की निगरानी के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाने को तैयार थी, ताकि अगर छात्रों को लगे कि सीआईडी उनकी बात नहीं सुन रही है, तो वे अपनी चिंताएं जाहिर कर सकें।
आंदोलन जारी रखेंगे छात्र
सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा है कि सरकार ने उसकी सीबीआई से जांच की मांग स्वीकार नहीं की है, इसलिए उनका ये प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी की तरफ से आयोजित सभी परीक्षाओं की सीआई और ईडी से जांच कराने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, सरकार ने सुधारों से जुड़ी हमारी लगभग सभी मांगें मान ली हैं, सिवाय एक-दो मुद्दों के। CGL परीक्षा के बारे में, छात्रों ने CBI जांच की मांग की थी लेकिन इसपर सहमति नहीं बन पाई। इसके बजाय, सरकार ने कहा कि एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाएगी, और अगर वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो ईडी को भी शामिल किया जाएगा। लेकिन अब भी हम सीबीआई से जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी रहेगा।


