जेल से बाहर आने के बाद आलमगीर आलम का बड़ा ऐलान, नहीं लड़ेंगे 2029 का चुनाव; वजह भी बताई
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब दो साल की सजा काटने के बाद जेल से बाहर आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे साल 2029 का आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब दो साल की सजा काटने के बाद जेल से बाहर आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे वर्ष 2029 का आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब वे अंतिम बार चुनाव जीतने के बाद मंत्री बने थे, तभी उन्होंने तय कर लिया था कि अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और केवल समाज की सेवा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि समय और परिस्थिति सबसे बलवान होती है, इसलिए कल क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। आइए जानते हैं आलमगीर आलम ने और क्या कहा है।
पूर्व मंत्री आलमगीर आलम ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में कभी भी मंत्री, स्पीकर या विधायक बनने के लिए किसी की दरबारी नहीं की। जेल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा, जब इंसान का समय बुरा होता है, तभी पता चलता है कि कौन अपना है और कौन पराया। जेल में बिताए दो सालों ने मुझे यही सबसे बड़ी सीख दी है। इस दौरान उन्होंने भविष्य की योजनाओं के लिए अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद रणनीति बनाने का फैसला किया है।
पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ करेंगे बैठक
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि आलमगीर आलम अभी बाइज्जत बरी नहीं हुए हैं, बल्कि सिर्फ अंतरिम जमानत पर बाहर आए हैं, पूर्व मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। आलमगीर आलम ने कहा कि यह बाबूलाल मरांडी की अपनी सोच है, जब वे अदालत से पूरी तरह बरी हो जाएंगे, तब इस पर जवाब देंगे। महागठबंधन के घटक दलों में चल रही आपसी अनबन के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे जल्द ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे और वर्तमान राजनीतिक स्थिति की पूरी जानकारी लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
देश की न्यायपालिका पर है पूरा भरोसा
अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। खुद को फंसाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बात आम जनता और मतदाताओं से पूछी जानी चाहिए कि उनकी असली पहचान क्या है। उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि दो साल जेल में रहने के बाद भी लोग उन्हें नहीं भूले। इसका प्रमाण यह है कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी ने उनसे भी अधिक वोटों से चुनाव जीता है।
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Mohammad Azamसंक्षिप्त विवरण
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