
झारखंड में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में एडमिशन के लिए एडवाइजरी जारी, क्या शर्तें
झारखंड सरकार के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश स्तर की कक्षाओं बाल वाटिका और पहली कक्षा में एडमिशन के लिए एडवाइजरी जारी कर दिया गया है। राज्य में 6 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस हैं।
झारखंड सरकार के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश स्तर की कक्षाओं बाल वाटिका और पहली कक्षा में एडमिशन के लिए एडवाइजरी जारी कर दिया गया है।स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, राज्य के सभी उत्कृष्ट विद्यालयों में बाल वाटिका (5 वर्ष आयु) तथा पहली कक्षा (6 वर्ष आयु) में प्रत्येक कक्षा में 40-40 बच्चों का एडमिशन किया जाएगा।
एडमिशन प्रक्रिया के लिए संबंधित जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा विद्यालयवार आवेदन जमा कर राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके आधार पर राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा सभी जिलों के उत्कृष्ट विद्यालयों की विद्यालयवार सीट विवरणी जारी की जाएगी।
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 16 फरवरी
एडमिशन से संबंधित विज्ञापन में सभी विद्यालयों के नाम एवं उपलब्ध सीटों की संख्या प्रकाशित की जाएगी। यह सूचना विद्यालयों के सूचना पट, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के सूचना पट एवं डिस्प्ले बोर्ड, तथा संबंधित विद्यालयों की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाएगी। दिशा-निर्देशों के तहत नामांकन के लिए विज्ञापन का प्रकाशन सभी जिलों द्वारा 22 जनवरी तक किया जाएगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 16 फरवरी निर्धारित की गई है।
ऑफलाइन आवेदन भी कर सकते हैं
अभिभावक संबंधित विद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध एडमिशन लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय अथवा संबंधित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से निर्धारित नामांकन प्रपत्र प्राप्त कर ऑफलाइन आवेदन भी जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में जमा किया जा सकता है।
अभिभावकों से शपथ पत्र लिया जाएगा
एडमिशन के लिए केवल संबंधित जिले में निवास करने वाले अभिभावकों के बच्चे ही पात्र होंगे। आवेदन प्राप्ति प्रपत्र विद्यालय द्वारा प्रदान की जाएगी, जिसका प्रारूप शीघ्र ही प्रकाशित किया जाएगा। एडमिशन प्रक्रिया में जिला स्तरीय आरक्षण नियमों का पालन किया जाएगा। साथ ही विद्यालय में नामांकन लेने वाले बच्चों के अभिभावकों से संबंधित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के प्रधानाध्यापक द्वारा यह शपथ पत्र लिया जाएगा कि अभिभावक अपने बच्चे के सुरक्षित विद्यालय आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
2 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को प्राथमिकता
चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता के आधार पर पहले विद्यालय से 2 किलोमीटर के दायरे में निवास करने वाले अभिभावकों के बच्चों को, उसके बाद विद्यालय से 7 किलोमीटर के दायरे में निवास करने वाले अभिभावकों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। बाल वाटिका एवं पहली कक्षा में एडमिशन के लिए निर्धारित आयु सीमा के अंतर्गत आने वाले बच्चों के आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे।
बाल वाटिका में ऐसे बच्चे जिन्होंने 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2025 के बीच 5 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो और पहली कक्षा में ऐसे बच्चे जिन्होंने 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2025 के बीच 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, उनका नामांकन लिया जाएगा।
राज्य में 6 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस
राज्य में संचालित 6 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में बाल वाटिका और पहली कक्षा में एडमिशन का अवसर मिलेगा। इन 6 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस (गर्ल्स) पाकुड़, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (गर्ल्स) खूंटी, डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस धनबाद, डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस चतरा, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (गर्ल्स) साहिबगंज, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (गर्ल्स) लातेहार शामिल है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




