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आदित्यपुर ऑटो कलस्टर: विकास के 15 साल........

हिन्दुस्तान टीम,आदित्यपुरPublished By: Newswrap
Sat, 26 Jun 2021 03:20 PM
आदित्यपुर ऑटो कलस्टर: विकास के 15 साल........

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर: विकास के 15 साल........

नोट: स्पेशल एडिशन की स्टोरी है, संपादक जी के निर्देशानुसार

फोटो: 1. ऑटो कलस्टर की बिल्डिंग

2. हाईटेक लैब

3. प्रशिक्षण लेते प्रशिक्षणाथी

4. तरल कचरा प्रबंधन प्लांट

5. ऑटो कलस्टर एमडी एसएन ठाकुर

आदित्यपुर। रणधीर कुमार राणा

आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के इकाईयों को टूल्स बनवाने, टेस्टिंग करवाने से लेकर प्रदूर्षण नियंत्रण के कार्य के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। मजबूरन उद्यमी पुने, कोलकाता, बंगलोर में टूल्स की टेस्टिंग करवाने को मजबूर थे। इससे समय और पैसे की बर्बादी हो रही थी। इस समस्या को दूर करने को लेकर 2005-06 में केन्द्र सरकार की स्कीम डीआईपीपी के माध्यम से उद्यमी संगठन एसिया के तत्कालीन अध्यक्ष एसएन ठाकुर की अध्यक्षता में झारखंड सरकार की उद्योग विभाग के सहयोग से मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री को प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया। जिसके बाद आदित्यपुर ऑटो कलस्टर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। 15 साल पूर्व आदित्यपुर टोलब्रीज के पास आदित्यपुर ऑटो कलस्टर की नींव रखी गयी और आज 15 साल बाद कोल्हान प्रमंडल के उद्योगो के लिए ऑटो कलस्टर वरदान से कम नहीं है। पीपीपी मोड पर बने आदित्यपुर ऑटो कलस्टर में वर्तमान में हाईटेक लैब के माध्यम से टूल्स की जांच के अलावे ठोस कचरा व तरल कचरा का निस्तारण व प्रशिक्षण आदि के कार्यक्रम चल रहे है। पेश है आदित्यपुर ऑटो कलस्टर के विकास के 15 वर्षो साल का सफर.....

आज से 15 साल पहले प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की एक रिपोर्ट ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की प्रगति पर बाधक बन गयी थी। पर्यावरण प्रदूषण के मामले में धनबाद जिले के बाद सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र को रेड जोन कैटोगरी में जाने के संकेत दिये थे। इसको देखते हुए आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष सह वर्तमान में ऑटो कलस्टर के एमडी एसएन ठाकुर की अध्यक्षता में प्रतिनिधमंडल राज्य सरकार के तत्कालीन उद्योग मंत्री से मिले और स्थिति से अवगत कराते हुए इसका समाधान को लेकर सुझाव दिये। केन्द्र सरकार द्वारा डीआईपीपी स्कीम के तहत देश भर में हाईटेक लैब, हजाड्स वेस्ट मैनेजमेंट, लिक्वीड वेस्ट मैनेजमेंट प्लॉंट की स्थापना के लिए प्रोजेक्ट मांगे गये थे। आदित्यपुर ऑटो कलस्टर की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के सहयोग से प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया। सबसे बड़ी बात है कि पुरे देश में आदित्यपुर ऑटो कलस्टर ही सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था। जिसमें हाईटेक लैब, ठोस कचरा प्रबंधन, व तरल कचरा प्रबंधन की स्थापना करनी थी। कुल 65 करोड़ करोड़ 73 लाख की प्रोजेक्ट पास हो गया और आयडा ने 5 एकड़ जमीन हाईटेक लैब के लिए, 12 एकड़ तरल कचरा के लिए तथा 25 एकड़ जमीन ठोस कचरा निस्तारण के लिए उपलब्ध करा दिया। केन्द्र सरकार द्वारा इसके लिए 46 करोड़ 35 लाख रूपये राज्य सरकार द्वारा 6 करोड़ 53 लाख तथा लोक उद्योग से 9 करोड़ 84 लाख 56 हजार की राशि प्राप्त हो गयी। वर्तमान समय में ऑटो कलस्टर में 15 सौ कंपनियों के टूल्स की जांच होती है। उनके डिजाईन आधारित टूल्स का निर्माण होता है तथा कंपनियों से निकला ठोस व तरल कचरा का निस्तारण किया जाता है। जिससे पर्यावरण प्रदूर्षण से बचाव हो रहा है।

दो सौ प्रकार के टूल्स की जांच

आदित्यपुर ऑटो कल्स्टर में वर्तमान में दो सौ प्रकार के टूल्स की कैलिब्रेशन की जाती है। प्रति माह करीब पांच हजार मशीनों की जांच की जाती है। वहीं हर साल कुछ नया जोड़ने का भी काम हो रहा है। ऑटो कलस्टर में टूल्स की जांच के लिए एनएबीएल से प्रमाणित प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से रबर उद्योगो की मशीन, माईंस, तराजू, ट्रांस्फरमर आदि शामिल है।

हाईटेक लैब में टाटा मोटर्स, टाटा स्टील के भी मशीनों की जांच

कंपनियों में उत्पादन की गुणवत्ता की जांच करनेवाले उपकरण ठीक से काम कर रही है या नहीं इसकी जांच आदित्यपुर ऑटो कलस्टर के हाईटेक लैब में होती है। सभी प्रकार के डाई टूल्स, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टीमकेन के उपकरण, माईंस के उपकरण आदि की जांच और कैलिब्रेशन होता है। जिससे पता चलता है कि मशीन ठीक से रिड कर रहा है या नहीं।

पेबर्स ब्लॉक व सिमेंट, कंक्रीट की भी जांच

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर में पेबर्स ब्लॉक, सिमेंट व कंक्रीट की गुणवत्ता की जांच होती है। इसके लिए नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड से अप्रुवल मिला है।

प्रतिमाह 8 सौ टन ठोस व 10 हजार केएल तरल कचरा का निस्तारण

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर में प्रतिमाह विभिन्न कंपनियों से निकलनेवाले वेस्ट में ठोस 8 सौ टन तथा तरल 10 हजार केएल वेस्ट का निस्तारण किया जाता है। तरल कचरा से केमिकल को अलग कर उस पानी को पुन: कंपनियों को वापस भेज दिया जाता है। इसके लिए रामकी एजेंसी द्वारा विभिन्न कंपनियों से टैंकर के माध्यम से प्लांट तक वेस्ट को लेकर फिर वापस पहुंचाने का काम करती है।

कोरोना काल में इनसेनरेशन प्लांट बना वरदान

पुरे कोल्हान क्षेत्र के अस्पतालो से निकलनेवाला मेडिकल वेस्ट का निस्तारण के लिए मात्र ऑटो कलस्टर के हजाड्स वेस्ट मैनेजमेंट का इनसेनरेशन प्लांट है। कोरोना काल में कोविड से जुड़े मेडिकल वेस्ट का निस्तारण इसी प्लांट में किया गया। कोल्हान के करीब 45 अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया गया।

राज्य सरकार के उद्योग निदेशक है ऑटो कलस्टर के निदेशक

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर के संचालन के लिए राज्य सरकार के उद्योग निदेशक ऑटो कलस्टर के निदेशक है। इसके अलावे जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक क्षेत्रीय डारेक्टर, एमडी के रूप में एसएन ठाकुर है। इसके अलावे उद्यमियों में संजय कुमार सिंह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, इंदर अग्रवाल अध्यक्ष , आरके सिन्हा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में है।

ट्रेनिंग का लाभ उठा रहे छात्र व कर्मचारी

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर में उद्योग से जुड़े रोजगार परक प्रशिक्षण भी दिये जा रहे है। जिससे प्रतिवर्ष हजारो छात्र-छात्राऐं व कर्मचारी लाभांवित हो रहे है। इसमें कैटिया, ऑटो कैड, मेटलर्जी लैब, मेट्रोलॉजी लैब, हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग, सीएनसी प्रोग्रामिंग एंड ऑपरेशन, भीएमसी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, वेव डिजाईन, सी प्लस प्लस, जावा, नेट एंड पीएचपी, टैली इआरपी, लाइव प्रोजेक्ट फोर सीएस, बीसीए, एमसीए, इंटरर्नशीप फोर इंजीनियरिंग स्टूडेंट आदि प्रशिक्षण के प्रोग्राम शामिल है।

करीब पांच सौ को मिला रोजगार

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर के हाईटेक लैब, सीईटीपी व एसटीपी की स्थापना से पांच सौ लोगो को रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। आसपास से शैक्षिणक संस्थानों के तकनिकी छात्रों को लैब की सुविधा मिली है।

2016 से पुरी तरह कार्य कर रहा ऑटो कलस्टर

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर भवन का निर्माण होने के बाद मशीनों की खरीददारी हुई। इसके बाद 2016 में पुरी तरह से काम करना शुरू कर दिया। आदित्यपुर ऑटो कलस्टर वर्तमान में और भी सेवाओं में विस्तार कर रहा है। शुरूआत के दौर में नुकसान में गया लेकिन वर्तमान में वित्तीय लाभ में जा रहा है।

आदित्यपुर ऑटो कलस्टर की जब आवश्यकता का एहसास हुआ तब काफी बाधाऐं सामने आयी। मैं खुद दिल्ली दौड़ा, जिसमें राज्य उद्योग विभाग का पुरा साथ मिला। इसके बाद केन्द्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पास किया और फंड प्राप्त हुआ। स्थापना काल में भी मुझे ही एमडी बनने का अवसर प्राप्त हुआ और जब ऑटो कलस्टर पुरी तरह से फंग्शन में आया तब भी मैं ही एमडी हूं। इस संस्था का लाभ आज कोल्हान के 15 सौ उद्योग उठा रहे है। उद्यमियों को अब अपने मशीनों और टूल्स की जांच के लिए पुणे और बंगलोर नहीं जाना पकड़ता है। यहां प्रशिक्षण केन्द्र में रोजगारपरक प्रशिक्षण छात्रो को दिया जा रहा है, जिससे छात्रों को सीधे नौकरी भी मिल रही है:एसएन ठाकुर, एमडी, आदित्यपुर ऑटो कलस्टर

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