रांची में गायब हो गई 36 एकड़ तालाब की जमीन, कैसे हुआ खुलासा; जांच शुरू
राजधानी का दिल कही जाने वाली रांची झील (स्वामी विवेकानंद सरोवर) की 36 एकड़ जमीन गायब हो गई। दस्तावेज में बड़ा तालाब समेत आसपास की 53 एकड़ जमीन नगर निगम की बताई जा रही है। इसमें से 17 एकड़ जमीन पर तालाब है।

राजधानी का दिल कही जाने वाली रांची झील (स्वामी विवेकानंद सरोवर) की 36 एकड़ जमीन का पता नहीं चल रहा। दस्तावेज में बड़ा तालाब समेत आसपास की 53 एकड़ जमीन नगर निगम की बताई जा रही है। इसमें से 17 एकड़ जमीन पर तालाब है। तालाब के हिस्से की 36 एकड़ जमीन के ‘गायब’ होने का पता तब चला, जब रांची नगर निगम की ओर से जमीन, परिसंपत्तियों को अद्यतन कर डिजिटलाइजेशन को लेकर पिछले दिनों छानबीन शुरू की गई। इसमें पता चला कि बड़ा तालाब अभी केवल 17 एकड़ क्षेत्र में है। तालाब का यह हिस्सा जलस्रोत होने की वजह से अभी तक बचा हुआ है। इससे स्पष्ट हो गया है कि खुदाई के बाद से कालांतर में तालाब के चारों ओर नगर निगम की शेष जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। इसमें भवन निर्माण समेत अन्य तरह से अवैध कब्जा शामिल है। इसके बाद अधिकारी हरकत में आ गए हैं।
180 साल पहले 52 एकड़ जमीन पर खोदा गया था तालाब
बड़ा तालाब 180 साल पहले 52 एकड़ जमीन पर खोदा गया था। 1845 में कुंवर श्रीनाथ ने तालाब के एक ओर पक्के घाट का निर्माण करवाया था।
53 एकड़ क्षेत्र की कराई जाएगी बड़े स्तर पर मापी
सवाल खड़े हो रहे हैं कि तालाब की 36 एकड़ जमीन आसमान खा गई या जमीन निगल गई है। हालांकि इसका पता लगाने के लिए तालाब के चारों ओर 53 एकड़ में फैले क्षेत्र की विस्तृत मापी कराई जाएगी। इस काम में अवैध कब्जे की सटीक पहचान के लिए ड्रोन मैपिंग भी होगी। इसके अलावा नगर निगम हर आधुनिक संसाधन का प्रयोग जमीन हथियाने वालों की पहचान के लिए करने जा रही है, ताकि अतिक्रमण की साफ तस्वीर सामने आ सके।
कल से शुरू होगी जांच
● तालाब के आसपास के सभी तरह के निर्माण की वैधता की बारीकी से शुरू होगी जांच
● निगम के अपर प्रशासक के नेतृत्व में गठित टीम सोमवार से विशेष अभियान शुरू करेगी
● जांच में अतिक्रमण का पता चलने पर अनाधिकृत वाद दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी
● प्रशासक ने अधिकारियों के साथ की है बैठक, लाल नवल किशोर नाथ शाहदेव ने रांची नगर निगम को तालाब और जमीन लीज पर उपलब्ध कराई थी
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Mohammad Azamसंक्षिप्त विवरण
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