24 जिला, 24 संकल्प और एक आवाज; झारखंड में छात्र नेता देवेंद्र महतो का नया अभियान

एएनआई, रांची
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झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक नए अभियान का ऐलान किया है। एक्स पर एक पोस्ट में महतो ने कहा कि JPSC-JSSC भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती अभियान का दूसरा चरण। 24 जुलाई से 24 जिला, 24 संकल्प और एक आवाज- भर्ती प्रक्रिया में सुधार।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो।

झारखंड में JPSC-JSSC भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती अभियान का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने प्रतियोगी परीक्षाओं के तहत होने वाली भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक नए अभियान का ऐलान किया है। महतो ने कहा कि '24 जिला, 24 संकल्प, एक आवाज' के नारे के साथ सोमवार 24 जुलाई से भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक अभियान शुरू किया गया है। एक्स पर एक पोस्ट में महतो ने कहा कि 24 जुलाई से शुरू भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मुहिम से जुड़ी जरूरी जानकारी। 24 जिला, 24 संकल्प और एक आवाज- भर्ती प्रक्रिया में सुधार। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद भर्ती प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जाहिर करना और ज्यादा पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग करना है।

नेमरा के लुकैया टांड से शुरू होगा

महतो ने बताया कि JPSC-JSSC भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती अभियान का दूसरा चरण सोमवार को रामगढ़ जिले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से शुरू होगा। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती व्यवस्था की मांग करने वाला यह अभियान 24 अगस्त को नेमरा के लुकैया टांड से शुरू होगा। महतो के अनुसार, भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा का उद्घाटन झारखंड की पारंपरिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार किया जाएगा। इसके शुभारंभ पर पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी, मांदर की थाप पर राष्ट्रगान गाया जाएगा, प्रमुख नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी और शाल का पौधा लगाया जाएगा।

जागरुकता और समर्थन पैदा करने का प्रयास

छात्र नेता ने कहा कि यात्रा भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता के मुद्दों पर राज्य भर में उम्मीदवारों और युवाओं के बीच जागरुकता और सार्वजनिक समर्थन पैदा करने का प्रयास करेगी। यात्रा रामगढ़ से शुरू होकर हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लातेहार, पलामू, गढ़वा और रांची जिलों से होकर गुजरेगी।

जेडीयू-जेएमएम आमने-सामने

इस बीच, महतो की 'भर्ती सुधार यात्रा' पर जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि भले ही झारखंड में सरकार के साथ समझौता हो गया हो, लेकिन आंदोलनकारियों को अभी भी हेमंत सोरेन सरकार पर भरोसा नहीं है। देवेंद्र महतो की पूरी यात्रा इस बात पर केंद्रित है कि कैसे हेमंत सोरेन सरकार समझौते की तय बातों को टाल सकती है। वहीं, झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडे का कहना है कि सुधार हो रहे हैं। सरकार गंभीर है। सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। हमारे छात्रों का मानना ​​है कि सरकार उनकी हितैषी है। सरकार काम कर रही है। देवेंद्र महतो राजनीति क्यों कर रहे हैं? छात्रों के हितों की बात करें और सुझाव दें।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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