बेटे की बीमारी ठीक करने के लिए बेटी की बलि चढ़ा दी, झारखंड में तंत्र-मंत्र का खौफनाक खेल

Subodh Kumar Mishra पीटीआई, हजारीबाग
share

झारखंड में तंत्र-मंत्र के नाम पर खौफनाक घटना सामने आई है। तांत्रिक के बहकावे में आकर एक मां ने अपनी बेटी की बलि चढ़ा दी। तांत्रिक ने उससे कहा था कि बेटे को सभी बीमारियों से ठीक करने के लिए उन्हें एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

बेटे की बीमारी ठीक करने के लिए बेटी की बलि चढ़ा दी, झारखंड में तंत्र-मंत्र का खौफनाक खेल

झारखंड में तंत्र-मंत्र के नाम पर खौफनाक घटना सामने आई है। तांत्रिक के बहकावे में आकर एक मां ने अपनी बेटी की बलि चढ़ा दी। तांत्रिक ने उससे कहा था कि बेटे को सभी बीमारियों से ठीक करने के लिए उन्हें एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि हजारीबाग जिले के कुसुमभा गांव में एक बलि अनुष्ठान के दौरान 13 साल की लड़की की गला घोंटकर मारने का मामला सामने आया है। इस संबंध में लड़की की 35 साल की मां, एक तांत्रिक और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन और हजारीबाग के डीआईजी अंजनी झा ने बुधवार देर रात हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन गिरफ्तारियों की घोषणा की। पुलिस ने बताया कि उन्होंने लड़की की मां रेशमी देवी, 55 साल की तांत्रिक शांति देवी और 40 साल के भीम राम को गिरफ्तार किया है। ये सभी एक ही गांव के रहने वाले हैं।

अष्टमी की रात घटना को अंजाम दिया

एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि रेशमी देवी अक्सर अपने गांव में एक 'तांत्रिक' (जादू-टोना करने वाले) के पास जाती थीं, ताकि अपने सबसे छोटे बेटे का इलाज करवा सकें। उनका बेटा कुछ मानसिक और शारीरिक बीमारियों से पीड़ित है।

एसपी ने बताया कि उस तांत्रिक ने मां से कहा कि बेटे को सभी बीमारियों से ठीक करने के लिए उन्हें एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। अधिकारी ने बताया कि 24 मार्च की रात यानी नवरात्र की अष्टमी की रात जब पूरा गांव त्योहार के जश्न में डूबा हुआ था और 'मंगला जुलूस' (राम नवमी का जुलूस) देख रहा था, तभी शांति देवी के घर पर उस लड़की का गला घोंट दिया गया। आरोप है कि यह काम उसकी अपनी मां और भीम राम ने मिलकर किया।

प्राइवेट पार्ट में छड़ी डाला

पुलिस ने दावा किया कि तांत्रिक ने लड़की के गुप्तांगों में एक लकड़ी की छड़ी डाल दी, जबकि भीम राम ने अनुष्ठान के लिए खून निकालने के मकसद से उसके सिर पर वार किया। लड़की की हत्या करने के बाद उन्होंने उसके शव को एक बगीचे में दफना दिया।

एसपी ने बताया कि तीनों ने रेप का दावा करके जांचकर्ताओं को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भीम राम पर अपनी भाभी और एक अन्य व्यक्ति की हत्या करने का भी आरोप है।

झारखंड हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया

उधर, झारखंड हाई कोर्ट ने सोमवार को हजारीबाग के बिशनुगढ़ में एक लड़की के कथित रेप और हत्या के मामले में खुद संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की एक डिवीजन बेंच ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस घटना का संज्ञान लिया।

बीजेपी ने बंद रखा

इससे पहले, लड़की की मां ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का अपहरण कर लिया गया था और 25 मार्च को गांव के एक खेत में उसका शव मिला था। राज्य की विपक्षी पार्टी बीजेपी ने इस हत्या के विरोध में सोमवार को हजारीबाग में 12 घंटे का बंद रखा।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

और पढ़ें