झारखंड CID का बड़ा खुलासा! ACF-FRO परीक्षा में 100 अभ्यर्थी पैसा देकर पास हुए; 3 तरीकों से की गई धांधली

लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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जेपीएससी के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा में धांधली और पैसे के खेल का एक बड़ा मामला सामने आया है। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इन दोनों परीक्षाओं में करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पास कराने की सेटिंग की गई थी।

झारखंड सीआईडी
झारखंड एसीएफ-एफआरओ में 100 अभ्यर्थी पैसे देकर हुए पास

जेपीएससी के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (एफआरओ) परीक्षा में धांधली और पैसे के खेल का एक बड़ा मामला सामने आया है। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इन दोनों परीक्षाओं में करीब 100 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पास कराने की सेटिंग की गई थी। केस में गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी और टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह के बयानों के अनुसार, पूरी परीक्षा प्रक्रिया में तीन अलग-अलग तरीकों से धांधली की जाती थी।

100 अभ्यर्थियों से 5 करोड़ की वसूली

पीटी में प्रति छात्र पांच लाख रुपये के हिसाब से लगभग 100 अभ्यर्थियों से करीब पांच करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। मुख्य परीक्षा में जिन छात्रों का उत्तर ठीक-ठाक लिखा होता था, उनके अंक बढ़ाने के लिए जांचकर्ताओं व प्रोफेसरों से संपर्क कर नंबर बढ़वाए जाते थे। इसके लिए हजारीबाग व रांची में अलग-अलग जगहों पर सॉल्वर गैंग के सदस्यों को बैठाकर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवायी गई थीं।

स्ट्रांगरूम से बाहर निकाली गई थीं उत्तरपुस्तिकाएं: जिन अभ्यर्थियों को उत्तर नहीं पता होते थे, उनकी उत्तर पुस्तिकाएं सीधे स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाली जाती थीं और मॉडल उत्तर उपलब्ध कराकर उनसे उत्तर लिखवाए जाते थे। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों की खाली ओएमआर शीट भरने के लिए विशेष रूप से लखनऊ और दिल्ली से टीम बुलाई गई थी। वहीं, आरोपी प्रदीप कुमार सिंह ने कबूला कि उसने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम से 30 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकालकर सौंपी थीं, जिन्हें बाहर लिखवाने के बाद वापस जमा कराया गया। आरोपी संजय के अनुसार, एफआरओ मेन्स के लगभग 25 और एसीएफ मेन्स के लगभग 15 अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में पीडीएफ एडिटर के माध्यम से बदलाव करके उन्हें पास कराया गया।

1.20 करोड़ का नकद लेनदेन और आगे की कार्रवाई

आरोपी रामबीर के बयान के मुताबिक, अभय तिवारी, धर्मेंद्र और आनंद ने उसे 15 अभ्यर्थियों का रोल नंबर दिया था, जिसमें प्रति कैंडिडेट आठ से 10 लाख रुपये में बात तय हुई थी। इस काम के एवज में अभय तिवारी ने उसे 1.20 करोड़ रुपये नकद दिए थे। मुख्य परीक्षा के पेपर रांची और हजारीबाग में बाहर लिखे गए थे। सीआईडी अब इन बयानों का भौतिक सत्यापन कर रही है और नतीजों के आधार पर अनुचित माध्यमों से पास होने वाले अभ्यर्थियों तथा इसमें शामिल अधिकारियों/बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।

कैसी-कैसी धांधली

1. मेंस में जिनका उत्तर ठीक-ठाक लिखा होता था, उनके अंक बढ़ाने के लिए जांचकर्ताओं व प्रोफेसरों से संपर्क किया जाता था

● हजारीबाग व रांची में अलग-अलग जगहों पर सॉल्वर गैंग के सदस्यों को बैठाकर इनकी उत्तर पुस्तिकाएं लिखवायी गई

2. जिन्हें उत्तर नहीं पता होते थे, उनकी उत्तर पुस्तिकाएं सीधे स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाली जाती थीं

● इन्हें मॉडल उत्तर देकर उत्तर लिखवाए जाते थे, खाली ओएमआर शीट भरने लखनऊ व दिल्ली से टीम बुलाई गई थी

Mohammad Azam

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संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।


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आजम का मानना है कि पत्रकारिता जनपक्षीय होनी चाहिए। पत्रकारिता के दौरान अपनी भावनाओं को काबू में रखकर तथ्य आधारित पत्रकारिता आजम को जिम्मेदार बनाती है। पत्रकारिता में आजम तथ्य आधारित सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही, साहित्यिक लेखन में भी महारत हासिल है।


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