'हिंदू अफसरों को धमकी क्यों नहीं...' कश्मीरी पंडितों पर फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने बुधवार को आरोप लगाया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाला प्रशासन घाटी में कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिलवा रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने से वंचित रखा जा सके।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने घाटी में कश्मीरी पंडितों को मिल रही हालिया धमकियों को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न देने की 'साजिश' बताया है। उन्होंने इसके लिए उपराज्यपाल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। फारूक अब्दुल्ला के इस बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब ताजा धमकी भरे पत्रों से पंडित कर्मचारी और उनके परिवार दहशत में हैं। विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय और भाजपा ने इन टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है।
'शायद ही यहां कश्मीरी पंडित रहते हैं'
दरअसल, फारूक अब्दुल्ला ने अनंतनाग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि धमकी कौन दे रहा है? कश्मीरी पंडित अब यहां शायद ही रहते हैं। यहां तैनात सभी बड़े अधिकारी बाहर के हिंदू हैं। महानिदेशक, उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सभी हिंदू ही हैं, है ना? उपायुक्त भी हिंदू ही हैं। उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? सवाल यह है कि अगर हिंदुओं को धमकाया जा रहा है, तो उन्हें (वरिष्ठ अधिकारियों को) धमकियों का सामना क्यों नहीं करना पड़ रहा है?
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके नेता ने दावा किया कि ये 'धमकियां' जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न देने की एक साजिश हैं। अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को इस मामले में जवाब देना चाहिए। उन्होंने इन 'धमकियों' के पीछे उपराज्यपाल प्रशासन का हाथ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? उनसे पूछा जाना चाहिए कि ये धमकियां कहां से आ रही हैं। मैं प्रशासन पर इन धमकियों को जारी करने का आरोप लगा रहा हूं। इसके लिए वही जिम्मेदार हैं।
इससे पहले दिन में श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरोध-प्रदर्शन के बारे में पूछे गए एक सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमसे किए गए वादे पूरे नहीं कर रही है। उसने कहा था कि पहले परिसीमन होगा, फिर चुनाव होंगे और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अब्दुल्ला ने पूछा- उस वादे का क्या हुआ?
अब्दुल्ला ने पूछा कि हमारे सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया था कि कुछ ही दिनों में इसे मंजूरी मिल जाएगी। यह बात जनवरी की है। अब सितंबर आ गया है। उस वादे का क्या हुआ? पीडीपी का नाम लिए बिना अब्दुल्ला ने कहा कि जिस पार्टी ने भाजपा को अनुच्छेद 370 हटाने में 'मदद' की, वह लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि हमारे दुश्मन हमारे बीच ही बैठे हैं। वही लोग जिन्होंने जम्मू कश्मीर का पूरा नक्शा बदल दिया, (अनुच्छेद) 370 और (अनुच्छेद) 35ए को हटवा दिया। आज वे राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की बात करते हैं। लेकिन उन्हीं लोगों ने इसे खत्म किया था। वही लोग भाजपा के साथ बैठे थे। और अब वे लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।
भाजपा का पलटवार
वहीं, भाजपा ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने उनके बयान को चौंकाने वाला और हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को नकार रहे हैं और साजिश के सिद्धांत गढ़कर उनके दर्द को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।


