
यह कश्मीर के लिए आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक, NC और PDP पर क्यों भड़की भाजपा
भाजपा की तरफ से कहा गया कि उमर अब्दुल्ला की एनसी और महबूबा मुफ्ती की पीडीपी कश्मीर के लिए आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक है। भाजपा ने कहा कि इन दोनों पार्टियों के नेताओं की तरफ से ऐसे बयान दिए जाते हैं, जो कश्मीर के लिए नकारात्मक होते हैं।
जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों पर भाजपा ने अपनी भड़ास निकाली है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पर आरोप लगाते हुए भाजपा की तरफ से कहा गया कि इनके क्षेत्रीय नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ राजनीतिक बयान जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद से भी बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता रजनी सेठी ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पीडीपी और एनसी का नेतृत्व लगातार विभाजनकारी बयान दे रहा है। इनके यह बयान सांप्रदायिक सद्भाव, विकास और क्षेत्र की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार ने धार्मिक भेदभाव के बिना जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए काम किया। बिना किसी भेदभाव के सभी को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला। राज्य की सुरक्षा स्थिति में भी सुधार हुआ है। लेकिन इसकी वजह से क्षेत्रीय दल मुख्य रूप से नेकां और पीडीपी, राजनीतिक वर्चस्व खोने से असहज हैं और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाले बयानों का सहारा ले रहे हैं।
राठी ने कहा, "मुझे लगता है कि जम्मू-कश्मीर में गैर-जिम्मेदार राजनीति से हुआ नुकसान कई मायनों में आतंकवाद से हुए नुकसान से कहीं अधिक है। आतंकवादी बाद में हम पर हमला करेंगे लेकिन इन बयानों के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हमें हो रहा है। कश्मीर आज पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है। कश्मीरी लोगों को शक की नजरों से देखा जा रहा है। आप सोच रहे होंगे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को संदेह की नज़र से क्यों देखा जा रहा है। ध्रुवीकरण करने वाले बयान देने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और महबूबा को लेनी चाहिए।"
उन्होंने दावा किया कि सीएम उमर अब्दुल्ला और पूर्व सीएम मुफ्ती द्वारा दिए जा रहे बयान भय पैदा करते हैं। पर्यटन को हतोत्साहित करते हैं और जम्मू-कश्मीर के बारे में नकारात्मक रूढ़ियों को मजबूत करते हैं।
राष्ट्रीय एकता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने उन क्षेत्रीय नेताओं की भी आलोचना की, जो राष्ट्रीय प्रतीकों और नारों के प्रति निष्ठा व्यक्त करने से इनकार करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे रुख से जनता का विश्वास कमजोर होता है और राष्ट्र-विरोधी तत्वों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को मुस्लिम-विरोधी के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं करना चाहिए बल्कि इसे राष्ट्र और उसके लोगों के प्रति प्रेम के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए।
सेठी ने कहा कि जम्मू के लोग खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं। हकीकत यही है कि वह भावनात्मक रूप से भी खुद को अलग महसूस करते हैं। ऐसे में केंद्र शासित प्रदेश की राजनीतिक उपेक्षा क्षेत्रीय असंतोष को और भी ज्यादा गहरा कर सकती है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर रोजगार एवं नशाखोरी से निपटने संबंधित वादे पूरे न करने का आरोप लगाया और दावा किया कि कि सख्त कार्रवाई के आश्वासनों के बावजूद कश्मीर में नशे की लत में तेजी से वृद्धि हुई है और सवाल उठाया कि युवाओं को वादा किया गया रोजगार अभी तक क्यों नहीं मिला है।
जवाबदेही की मांग करते हुए सेठी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से उन बयानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया जिन्हें उन्होंने "राष्ट्र-विरोधी" बयान करार दिया, जो सांप्रदायिक तनाव को भड़का सकते हैं।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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