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हिंदी न्यूज़ जम्मू और कश्मीरअनुच्छेद 370 के रहते कश्मीर में क्यों नहीं आई शांति? फारूक अब्दुल्ला को अमित शाह ने दिया जवाब

अनुच्छेद 370 के रहते कश्मीर में क्यों नहीं आई शांति? फारूक अब्दुल्ला को अमित शाह ने दिया जवाब

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीNishant Nandan
Sat, 04 Dec 2021 03:15 PM
अनुच्छेद 370 के रहते कश्मीर में क्यों नहीं आई शांति? फारूक अब्दुल्ला को अमित शाह ने दिया जवाब

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अनुच्छेद 370 वहां दशकों से था लेकिन क्या जम्मू और कश्मीर में शांति थी? यह सवाल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को पूछा। अमित शाह ने जोर देते हुए कहा कि इस संविधान के इस अनुच्छेद के हटाने से वहां शांति, अच्छे व्यापार निवेश और टूरिस्टों के आगमन की शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृहमंत्री ने यह बात एचटी लीडरशिप समिट के दौरान कही। अमित शाह ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फाारूक अब्दुल्ला के उस बात का जवाब भी दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक वहां अनुच्छेद 370 फिर से लागू नहीं किया जाता तब तक वहां शांति नहीं आएगी। फारूक के इसी बयान पर अमित शाह ने जवाब दिया कि जब जम्मू और कश्मीर में दशकों से अनुच्छेद 370 था तब क्या वहां शांति थी?

अमित शाह ने कहा कि वहां करीब 75 साल आर्टिकल 370 लागू था। तो वहां पर शांति क्यों नहीं थी? अगर शांति और आर्टिकल 370 में कोई रिलेशन होता तो क्या साल 1990 में यह आर्टिकल वहां लागू नहीं था? यह आर्टिकल साल 1990 में वहां था तब वहां शांति क्यों नहीं थी? अगर हम टारगेट कीलिंग के आंकड़ों को देखें तो यह 10 फीसदी के आसपास भी नहीं है। इसका मतलब है कि वहां शांति है। 

इससे पहले अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि किसी को विश्वास नहीं था कि आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35-A को कभी निरस्त भी किया जा सकता है। अमित शाह ने कहा, मैं खुश हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। कश्मीर में अब शांति है। निवेश हो रहा है। पर्यटक जम्मू और कश्मीर आ रहे हैं।

आर्टिकल 370 संविधान का अस्थाई प्रोविजन था। इससे जम्मू और कश्मीर को स्पेशल स्टेटस हासिल था, जबकि आर्टिकल 35-A के भारत के अन्य लोगों को वहां प्रॉपर्टी खरीदने से रोकता था। दोनों अनुच्छेद 5 अगस्त, 2019 को निरस्त कर दिये गये और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। जिसमें जम्मू और कश्मीर और लद्दाख शामिल थे। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक आम बयान उनके खिलाफ जारी की गई थी जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैंने जम्मू और कश्मीर में लंबे समय तक कर्फ्यू लगाया गया था और इंटरनेट सेवाएं ब्लॉक कर दी गई थीं। अमित शाह ने कहा, ' जब मैं वहां गया जब मैंने वहां युवाओं से पूछा कि अगर हम कर्फ्यू हटा देतें तो किसकी जान जाएगी? इसके बाद वहां शुरुआती खामोशी छा जाएगी, लेकिन इसके बाद उन्होंने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि वो लोग मारे जाएंगे। 

अमित शाह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों वहां चुनाव कराए जाने की मांग कर रही थीं। अमित शाह ने कहा कि संसद ने कानून पास कर दिया है और परीसिमन का काम पूरा होने के बाद वहां चुनाव कराए जाएंगे। अमित शाह ने कहा कि लेफ्टिनेंट गवर्नर के शासन के दौरान वहां विकास हो रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार आया है।

टूरिस्टों का आना-जाना बढ़ा है। केंद्र शासित राज्य के सोशल सेक्टर में विकास दिखाता है कि कम समय में अच्चे के लिए कई सारी चीजें बदली हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मुझे आशा है कि कश्मीर के लोग इस बदलाव का स्वागत करेंगे..मैं सभी राजनीतिक पार्टियों से आग्रह करता हूं कि वो इस राजनीतिक और प्रजातांत्रिक प्रॉसेस का हिस्सा बनें।

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