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कश्मीर के हालात नॉर्मल समझना, आत्महत्या जैसा कदम; पंडितों के संगठन ने चेताया

पीटीआई,जम्मूGaurav Kala
Sat, 23 Oct 2021 08:16 PM
कश्मीर के हालात नॉर्मल समझना, आत्महत्या जैसा कदम; पंडितों के संगठन ने चेताया

हालिया दिनों घाटी में आम लोगों की हत्या से गैर कश्मीरी और कश्मीरी पंडितों की नींद उड़ी हुई है। कश्मीरी पंडितों के एक संगठन पनुन कश्मीर ने कहा कि घाटी में सामान्य हालात का नाटक करना आत्महत्या के रास्ते पर चलने जैसा है। संगठन ने सरकार से जम्मू में सभी विस्थापित हिंदुओं के स्थायी पुनर्वास एक अलग जगह के निर्माण की मांग की है। 

कश्मीरी पंडितों ने सभी विस्थापित हिंदुओं के स्थायी पुनर्वास और क्षेत्र में शांति के लिए जम्मू को अलग करने के लिए झेलम नदी के उत्तर और पूर्व में एक अलग राज्य के निर्माण की मांग की है। 
पनुन कश्मीर ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में इस वक्त चल रहा है वो कानून नहीं है, ये व्यवस्था की समस्या है। भारत सरकार को इस बात को समझने की जरुरत है। संगठन का कहना है, "हम यहां सामान्य स्थिति का नाटक कर रहे हैं, देश इसकी महंगी कीमत भुगत चुका है और ऐसा जारी रखना आत्महत्या के रास्ते पर चलने जैसा है। "

पनुन कश्मीर के चैयरपर्सन अजय चुंगू ने घाटी में सरकारी नौकरी पाने वाले हजारों कश्मीरी पंडितों के कहा, "वे पिंजरे में बंद कबूतरों की तरह हैं और हर समय डर में रहते हैं। वे जिहादी युद्ध के के शिकार हैं।" उन्होंने कहा कि प्रवासी पंडितों को रोजगार पैकेज देना उनकी समस्या का हल नहीं है। चुंगू ने कहा कि जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। 

उन्होंने आगे कहा कि तालिबान ने कश्मीर को विभाजित करने के लिए एक गंभीर समस्या पैदा कर दी है। कश्मीर से निकाले गए सभी हिंदुओं के स्थायी पुनर्वास के लिए झेलम नदी के उत्तर और पूर्व में पनुन कश्मीर का निर्माण होना शांति के लिए बेहद जरूरी है। चुंगू ने पाकिस्तान को आतंकवादी राज्य घोषित करने की भी मांग की। कहा कि जम्मू कश्मीर में इस वक्त आतंक की फसले उगाई जा रही है। इसे नष्ट करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। केवल आतंकियों का खात्मा ही काफी नहीं है, इस जहरीले पेड़ को ही जड़ से उखाड़ने की जरुरत है। 

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