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आतंकियों ने जिसे धर्म पूछकर मारा, अनाथ मुस्लिम लड़की का खर्च उठाती थी वह सिख प्रिंसिपल

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली Nootan Vaindel
Fri, 15 Oct 2021 11:28 AM
आतंकियों ने जिसे धर्म पूछकर मारा, अनाथ मुस्लिम लड़की का खर्च उठाती थी वह सिख प्रिंसिपल

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श्रीनगर के अलोचीबाग इलाके में आरपी सिंह के घर पर वीवीआईपी लोगों का आना-जाना अब कम हो गया है। एक सप्ताह पहले एक सरकारी स्कूल में आतंकवादियों द्वारा उनकी पत्नी सुपिन्दर कौर से उनका धर्म पूछने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे परिवार शोक में डूबा हुआ है और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। इसी हमले में दीपक चंद भी मारे गए थे। इस हमले में मारी गई प्रिंसिपल कौर काफी नेक दिन इंसान थीं, वे अपने पड़ोस में रहने वाली अनाथ मुस्लिम लड़की की पढ़ाई का खर्च उठाती थीं।

झेलम तट पर उनके दो मंजिला घर में, दोस्तों द्वारा एक बैनर लगाया गया है जो 46 वर्षीय स्कूल प्रिंसिपल की जिंदगी को देखते हुए, एक उपयुक्त श्रद्धांजलि देता है। बैनर में लिखा है, 'एक मुस्लिम अनाथ लड़की ने अपनी सिख गॉडमदर खो दी है।"

कौर अपनी कमाई का एक हिस्सा पड़ोस की एक मुस्लिम अनाथ लड़की के कल्याण के लिए खर्च कर रही थी। उन्होंने एक स्कूल हेल्पर की भी आर्थिक मदद की, जिसका शहर के एक अस्पताल में डायलिसिस चल रहा था। सुपिन्दर के सक्रिय सामाजिक कार्यों के बावजूद, उनके पति नहीं चाहते कि इन सबको प्रचारित किया जाए।  वो कहते हैं, “यह हमारे लिए या उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। वह कभी भी इसे बड़ा नहीं बनाना चाहती थी, ” उनकी बेटी जसलीन कौर (11) और बेटा जसजीत सिंह (4) अभी भी अपनी मां की मौत को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।

सुपिन्दर की हत्या ने सिख समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। ऐसा लगता है कि इस घटना ने घाटी में 1.5 लाख सिखों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। अतीत में भी आतंकवादी हमलों का सामना करने के बावजूद समुदाय ने यहां रहने का विकल्प चुना था। साल 2000 में, अनंतनाग के छत्तीसिंहपोरा गांव में आतंकवादियों द्वारा छत्तीस सिखों की हत्या कर दी गई थी। लेकिन एक स्कूली शिक्षक को निशाना बनाने से समुदाय चिंतित और जवाब के लिए जूझ रहा है।

आरपी सिंह कहते हैं,  “सरकारी अधिकारी और राजनेता हमसे कहते रहते हैं कि हमें सतर्क रहना चाहिए। इसका क्या मतलब है? यदि एक स्कूली शिक्षक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी जाती है तो इससे क्या संदेश जाता है? एक निहत्थे हानिरहित नागरिक से किसी ऐसे व्यक्ति से अपना बचाव करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है जो मारने के लिए तैयार है?” 

अलोचीबाग, वजीर बाग और राज बाग समेत श्रीनगर के विभिन्न इलाकों में रहने वाले सिख अब अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं. "हमने यहां रहने का फैसला किया क्योंकि हमें लगा कि यह हमारा घर है। लेकिन जब इस तरह की चुनिंदा हत्याएं होती हैं, तो यह हमारे विश्वास को झकझोर कर रख देती है और बहुसंख्यक समुदाय को उग्रवादियों के खिलाफ मुखर होकर बोलने की जरूरत है, ”जवाहर नगर के एक सिख निवासी ने कहा।

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