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कश्मीर में आतंकवाद पर प्रहार जारी, हुर्रियत कांफ्रेंस पर केंद्र सरकार चलाएगी 'बुलडोजर'

लाइव हिन्दुस्तान,श्रीनगर।Himanshu Jha
Fri, 26 Nov 2021 09:47 AM
कश्मीर में आतंकवाद पर प्रहार जारी, हुर्रियत कांफ्रेंस पर केंद्र सरकार चलाएगी 'बुलडोजर'

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केंद्र सरकार जल्द ही हुर्रियत कांफ्रेंस पर कार्रवाई करने जा रही है। सरकार गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत इसे एक गैरकानूनी संगठन घोषित कर सकती है। इसमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को पनाह देने और उनके नेताओं की कथित संलिप्तता को प्राथमिक आधार के रूप में शामिल किया गया है।

'टाइम्स ऑफ इंडिया" की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया है कि गृह मंत्रालय आने वाले दिनों में  यूएपीए की धारा 3(1) के तहत  हुर्रियत कांफ्रेंस के सभी गुटों पर मुकदमा चलाने पर अंतिम फैसला करेगा। इसमें उदारवादी हुर्रियत और तहरीक-ए-हुर्रियत शामिल हैै, जिसका नेतृत्व कभी कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी किया करते थे। उनकी हाल ही में मौत हुई है।

जम्मू-कश्मीर सरकार और एनआईए ने पहले हुर्रियत को 'गैरकानूनी संगठन' के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए एक मामला बनाने के लिए गृह मंत्रालय को इनपुट और डेटा प्रस्तुत किया था। सूत्र ने कहा है कि गृह मंत्रालय द्वारा कुछ अतिरिक्त इनपुट और डेटा मांगे गए थे। सूत्रों ने कहा कि स्पष्टीकरण और अतिरिक्त जानकारी अब जमा कर दी गई है। सभी गुटों और मोर्चों सहित हुर्रियत कांफ्रेंस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय जल्द ही आने की उम्मीद है।

हाल के कुछ वर्षों में हुर्रियत पर काफी लगाम लगाया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इनसे जुड़े कई मामलों में कार्रवाई कर रही है। हुर्रियत कांफ्रेंस की घाटी में उपस्थिति और गतिविधियों में भारी गिरावट देखी गई है।

एक अधिकारी ने कहा, "हुर्रियत कांफ्रेंस पर प्रतिबंध से उसकी आतंकियों को पनाह देने की योजनाओं और गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान के आईएसआई के कथित निर्देशों पर सामुदायिक आयोजनों में लोगों से धन का संग्रह और उनका आगे वितरण पर चोट पहुंचेगा।  उन्होंने कहा, “एक बार प्रतिबंध लगने के बाद, हुर्रियत और उसके सभी गुटों को अपने कार्यालयों और बुनियादी ढांचे को खत्म करना होगा।'

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर सरकार ने "पूरे आतंकी ढांचे को खत्म करने" के उद्देश्य से कई सख्त कदम उठाए हैं, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करना और उन लोगों को सरकारी लाभ से वंचित करना शामिल है जो ओवरग्राउंड वर्कर्स या आतंकी हमदर्द पाए जाते हैं।

केंद्र ने पहले यूएपीए के तहत जेकेएलएफ और जमात ए इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो एक समय में हुर्रियत कांफ्रेंस के घटक थे।

आपको बता दें कि हुर्रियत सम्मेलन की स्थापना 1993 में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक दलों के अलग-अलग विचारधाराओं के साथ हुई थी।

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