पहलगाम में अब ‘QR कोड’ वाली सुरक्षा, स्कैन करते ही निकल आएगी सारी जानकारी

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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पहलगाम आतंकी हमले को एक साल होने वाले हैं। यहां स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नया तरीका निकाला है। पहलगाम में पर्यटन स्थलों के आसपास के लोगों को क्यूआर कोड दिया जा रहा है, जिसे स्कैन करने पर उनकी सारी डीटेल निकल आएगी। 

पहलगाम में अब ‘QR कोड’ वाली सुरक्षा, स्कैन करते ही निकल आएगी सारी जानकारी

बीते वर्ष अप्रैल महीने में ही जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था जिसने पूरे देश को दहला दिया था। पहलगाम की पुलिस ने इस पूरे इलाके में सुरक्षा को सख्त करने के लिए अब कार्ड की जगह क्यूआर कोड का रास्ता निकालाय है। यहां पहाड़ी इलाकों में काम करने वाले लोगों, टैक्सी ड्राइवर, पोनी हैंडलर और घुमंतू लोगों को भी एक क्यूआर कोड दिया जा रहा है। इसे आईकार्ड की तरह लटकाना होगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही व्यक्ति की सारी डीटेल आप मोबाइल में देख सकते हैं। इसे गूगल लेंस से भी स्कैन किया जा सकता है।

क्या-क्या डीटेल पता चलेंगी

इस क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति का नाम, पता, फोन नंबर, आधार कार्ड का नंब, पिन कोड और उसका प्रोफेशन सब पता चल जाएगा। बता दें कि पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला करके 26 लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद यहां स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित और सख्त करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

स्थानीय पुलिस का कहना है कि यह देश की सबसे बड़ा पहचान अभियान है। इसका उद्देश्य 25 हजार लोगों को एक आइडेंटिटी सिस्टम के तहत लाना है। अब तक पहलगाम के इलाके में लगभग 7 हजार लोगों को क्यूआर कोड दिए जा चुके हैं। स्थानीय पुलिस के मुताबिक इसके लिए अप्लाई करने वाले को सबसे पहले वेरिफिकेशन फॉर्म जमा करना होगा। इसके बाद पुलिस उसका पूरा बैकग्राउंड चेक करती है और फिर क्यूआर कोड जारी किया जाता है।

अगर किसी व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है तो उसे क्यूआर नहीं जारी किया जाता है। क्यूआर कोड यहां 'खिदमत' सर्विस सेंटर की मदद से जारी किया जाता है। पहलगाम में 17-18 ऐसी जगहें हैं जहां पर्यटक ज्यादा आते हैं। इन इलाके में रहने वाले लोगों को तेजी से क्यूआर कोड दिए जा रहे हैं। यह क्यूआर कोड केवल सुरक्षाबल ही नहीं बल्कि टूरिस्ट भी स्कैन कर सकते हैं। बता दें कि बैसरन में आतंकी हमलों के बाद कई स्थानीय लोग भी आतंकियों के साथ मिले होने के लिए शक के दायरे में थे।

पुलिस ने कम से कम 20 पोनी हैंडलर, गाइड और सामान बेचने वाले लोगों से पूछताछ की थी। बाद में एनआईए ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया था। यहां के एक स्थानीय शख्स ने कहा कि पहले के पुलिस के वेरिफिकेशन प्रॉसेस में कई कमियां थीं। इसीलिए अब क्यूआर कोड का तरीका अपनाया गया है। पहलगाम में करीब 3500 पोनी सर्विस यानी खच्चर वाले हैं. इसके अलावा सामान बेचने वाले, फोटोग्राफर, फ्रीलांस गाइड भी हैं।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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