‘CM उमर अब्दुल्ला लापता’…पोस्टर से जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान, BJP पर फारूक के आरोपों की बौछार; क्या बोले?

पीटीआई, श्रीनगर
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फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये सब हमारे दुश्मन फैला रहे हैं। गठबंधन कायम है, कुछ नहीं होगा।

‘CM उमर अब्दुल्ला लापता’…पोस्टर से जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान, BJP पर फारूक के आरोपों की बौछार; क्या बोले?

जम्मू-कश्मीर में उस समय राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब भाजपा ने मुख्यमंत्री का मजाक उड़ाने के उद्देश्य से ऑनलाइन 'उमर अब्दुल्ला लापता' के पोस्टर प्रसारित किए। भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने अब्दुल्ला के लापता होने के पोस्टर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए, जिसमें अब्दुल्ला के बारे में जानकारी मांगी गई और दावा किया गया कि वह "पिछले दस दिनों से लापता हैं।'' भाजपा की तरफ से यह आलोचना ऐसे समय में की जा रही है, जब खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री निजी दौरे पर राज्य से बाहर हैं।

पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और उर अब्दुल्ला के पिता फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्षी दल के पास करने के लिए "इससे बेहतर कुछ नहीं" है। पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में सामूहिक नमाज अदा करने के बाद पत्रकारों से कहा, “उनके अपने अभियान हैं, वे जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। हमें उन्हें जवाब देने की जरूरत नहीं है।”

गठबंधन टूटने की अफवाहों को सिरे से खारिज किया

फारूक ने जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ये सब हमारे दुश्मन फैला रहे हैं। गठबंधन कायम है, कुछ नहीं होगा।" ईंधन आपूर्ति संकट को लेकर बनी चिंताओं का जिक्र करते हुए फारूक ने उम्मीद जताई कि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्द ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त होगा, और ईश्वर की कृपा से हम इन कठिनाइयों से बाहर निकल आएंगे।”

हम इसमें शामिल नहीं हैं

जम्मू के सिधरा इलाके में गुर्जर और बकरवाल परिवारों के घरों को हाल ही में गिराए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर, NC अध्यक्ष ने कहा कि इसमें उनकी पार्टी या राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, “हम इसमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने (उपराज्यपाल ने) यह किया है, और इसकी जांच चल रही है। यह सिर्फ सिधरा में ही नहीं, बल्कि जम्मू के अन्य इलाकों में भी हुआ है, जहां गुर्जरों पर इस तरह के हमले हुए हैं। वे यह नहीं समझते कि ये लोग सीमाओं पर सबसे बड़े हमदर्द थे।”

PDP पर भी बरसे अब्दुल्ला

विपक्षी पार्टी PDP के इस आरोप पर कि J&K सरकार UP के CM योगी आदित्यनाथ के मॉडल को अपना रही है, अब्दुल्ला ने उन पर जमकर हमला बोला और कहा, "यह उन्हीं लोगों की करतूत है, जिन्होंने यह सारा बखेड़ा खड़ा किया है।" फारूक ने दावा किया, "उन्होंने ही अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म किया। हमारे राज्य की बर्बादी के लिए वही ज़िम्मेदार हैं। अब वे ही शोर मचा रहे हैं। आखिर उनका काम क्या है? मुझे इस बात का दुख है कि उन्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती। वे हमें बर्बादी की ओर ले गए और अब ढोल पीट रहे हैं। उन्हें सबसे पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि उन्होंने यहां के लोगों के लिए कितनी मुसीबतें खड़ी की हैं।"

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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