ईरान याद आने में एक महीना लग गया; उमर अब्दुल्ला की निंदा पर महबूबा मुफ्ती का तंज

भाषा
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में ईरान पर हुए हमले की निंदा की तो महबूबा मुफ्ती ने उनपर तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध की निंदा करने में उन्हें एक महीने का समय लग गया। आपसे आगे तो पंजाब वाले हैं।

ईरान याद आने में एक महीना लग गया; उमर अब्दुल्ला की निंदा पर महबूबा मुफ्ती का तंज

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ईरान पर इजराइल के हमले की निंदा करने के लिए लगभग एक महीने का समय लेने के लिए शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधा। अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में, ईरान पर थोपे गए युद्ध की निंदा की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया कि वह मानवता के हित में युद्ध खत्म करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।

मुख्यमंत्री ने कहा, मैं अपने और मेरे सहयोगियों की ओर से ईरान पर थोपे गए इस अन्यायपूर्ण और अवैध युद्ध की कड़ी निंदा करता हूं। मैं अयातुल्ला खामेनेई, उनके सहयोगियों और इस संकट में जान गंवाने वाले सभी लोगों के प्रति शोक व्यक्त करता हूं।' महबूबा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए लिखा, "यह वास्तव में निराशाजनक है कि हमारे मुख्यमंत्री को ईरान पर इजराइल के घृणित हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करने में पूरे एक महीने का समय लग गया।'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां तक कि पंजाब विधानसभा ने भी तेजी दिखाते हुए हमले की निंदा की और वह ईरान के साथ एकजुटता दिखाने के लिए प्रस्ताव पारित करने वाली पहली विधानसभा बनी। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर सरकार ने ऐसी कोई तत्परता या वास्तविक चिंता नहीं दिखाई, बल्कि अपनी प्रतिक्रिया को केवल बयानबाजी और भाषणों तक ही सीमित रखा।'

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में कहा, ''मैं ईरान पर थोपी गई इस अन्यायपूर्ण और अवैध जंग की अपनी और अपने सहयोगियों की ओर से कड़ी निंदा करता हूं। मैं अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और इस संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।'' जम्मू कश्मीर विधानसभा में पांच सप्ताह के अवकाश के बाद शुक्रवार को बजट सत्र फिर से शुरू होने पर हंगामा मचने के बीच सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा।

स्थगन के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने सदन के नेता से ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में बयान देने की मांग की। इस मांग के समर्थन और विरोध में विभिन्न विधायकों के संक्षिप्त भाषण हुए। अब्दुल्ला ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर से शुरुआत में कहा, ''इस मुद्दे पर सदन एकमत नहीं है; इस पर एक राय नहीं है। यदि आप चाहें, तो चर्चा कराई जा सकती है ताकि अलग-अलग विचार व्यक्त किए जा सकें। अगर मैं इस मांग के पक्ष में बोलूं और उसके बाद विरोध सामने आए तो यह उचित नहीं होगा।' उन्होंने अध्यक्ष से यह तय करने को कहा कि आगे कैसे बढ़ा जाए। राठेर ने दोनों पक्षों के कई सदस्यों की राय सुनने के बाद मुख्यमंत्री से सदन में बयान देने का अनुरोध किया और कहा कि संसद में भी ऐसा किया गया है।

अब्दुल्ला ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि कोई भी यहां खड़े होकर ईरान पर थोपे गए अन्यायपूर्ण एवं अवैध युद्ध का समर्थन कर सकता है। कितनी भी निंदा करके यह बयां नहीं किया जा सकता कि मानवता को किस प्रकार कुचला गया और ईरान के सर्वोच्च नेता एवं उनके करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों को किस क्रूर तरीके से मारा गया।'' उन्होंने एक स्कूल पर बमबारी में बड़ी संख्या में छात्राओं के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के समय में इससे अधिक भयावह घटना नजर नहीं आती।

उन्होंने कहा, ''और, उद्देश्य क्या है? यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। अगर आप अमेरिका से आ रहे बयानों को सुनें, तो लगता है कि उन्हें स्वयं पक्के तौर नहीं पता। सुबह वे सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं, दोपहर में सुरक्षा चिंताओं की और शाम तक तेल की कीमतों की बात करने लगते हैं। शायद उन्हें खुद भी नहीं पता कि पिछले तीन सप्ताह से ईरान के लोगों को क्यों पीड़ा झेलनी पड़ी।''

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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