किताबों में आतंकियों का महिमामंडन करने पर 8 अधिकारी निलंबित, BJP बोली- यह एकेडमिक जिहाद
जांच में लगाए गए आईएएस अधिकारी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी। उपराज्यपाल ने आरोपी लेखकों और प्रकाशकों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित और काली सूची में डालने के आदेश दिए हैं।

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए आतंकियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का कथित तौर पर महिमामंडन करने वाली दो किताबों के चयन और खरीद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित करते हुए एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दीं। उपराज्यपाल ने इस मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
जांच में लगाए गए आईएएस अधिकारी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी। उपराज्यपाल ने आरोपी लेखकों और प्रकाशकों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित और काली सूची में डालने के आदेश दिए हैं। उनके द्वारा लिखे या प्रकाशित सामग्री को भी जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से हटा लिया जाएगा।
भाजपा ने इसे एकेडमिक जिहाद करार दिया
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस मुद्दे को सिर्फ एकेडमिक चूक नहीं, बल्कि आपराधिक मामला बताया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह एकेडमिक जिहाद का हिस्सा है, जिसका मकसद शिक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल करके पाकिस्तान-समर्थित धारणा फैलाना है। उन्होंने दावा किया कि किताब में आतंकी मकबूल भट, हाफिज सईद और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक समेत अन्य को सकारात्मक रूप में दिखाया गया है।
लेखक के बारे में
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