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जाकिर नाइक को बचाने के लिए यूनुस की चाल? शेख हसीना को घोषित किया भगोड़ा; नोटिस जारी

जाकिर नाइक को बचाने के लिए यूनुस की चाल? शेख हसीना को घोषित किया भगोड़ा; नोटिस जारी

संक्षेप:

नाइक चरमपंथ भड़काने के आरोप में भारतीय प्राधिकारियों द्वारा वांटेड है। वह 2016 में भारत छोड़कर चला गया था। नाइक को मलेशिया में महातिर मोहम्मद के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने स्थायी निवास की अनुमति दी थी।

Sat, 1 Nov 2025 01:14 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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बांग्लादेश के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने दो प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में नोटिस जारी कर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य 260 लोगों को देशद्रोह के एक मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया। यह कदम 'जॉय बांग्ला ब्रिगेड' नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। दरअसल मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस प्लेटफॉर्म पर सरकार को अस्थिर करने और हिंसा भड़काने की साजिश का इल्जाम लगाया गया है। सीआईडी ​​के विशेष अधीक्षक (मीडिया) जसीम उद्दीन खान द्वारा साइन किए गए इस नोटिस को अंग्रेजी और बंगाली में प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि इसे ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर प्रकाशित किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि यूनुस सरकार ने भारत के भगोड़े जाकिर नाइक को बचाने के लिए ये कदम उठाया है जो कुछ ही दिनों में बांग्लादेश जाने वाला है।

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जाकिर नाइक पर ऐक्शन ले बांग्लादेश- भारत की मांग

विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक इस महीने बांग्लादेश की यात्रा पर जा रहा है। इसको लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में कहा कि वह जहां भी जाएगा, भारत उसके खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद करता है। जायसवाल ने कहा कि वह एक भगोड़ा है। वह भारत में वांटेड है। इसलिए, हम उम्मीद करते हैं कि वह जहां भी जाएगा, वहां के लोग उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे और हमारी सुरक्षा चिंताओं का समाधान करेंगे। नाइक कथित तौर पर धन शोधन और नफरती भाषणों के जरिए चरमपंथ भड़काने के आरोप में भारतीय प्राधिकारियों द्वारा वांटेड है। वह 2016 में भारत छोड़कर चला गया था। नाइक को मलेशिया में महातिर मोहम्मद के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने स्थायी निवास की अनुमति दी थी।

जाकिर नाइक को बचाने के लिए यूनुस की नई चाल?

भारत द्वारा जाकिर नाइक को भगोड़ा बताए जाने और कार्रवाई की मांग करने के ठीक एक दिन बाद, यूनुस सरकार ने हसीना को भी भगोड़ा घोषित कर दिया। नाइक के दौरे को खुद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने दी मंजूरी दी है। एक आतंकवादी हमले के बाद हसीना सरकार ने नाइक के बांग्लादेश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन अब यूनुस सरकार ये जताना चाहती है कि अगर भारत हसीना को नहीं सौंपेगा तो वह जाकिर नाइक के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं करेगा।

भगोड़ा घोषित शेख हसीना

शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान सत्ता से अपदस्थ होकर भारत भाग आई थीं। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जुलाई विद्रोह के दौरान प्रदर्शनकारियों की मौत से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। बांग्लादेश बार-बार भारत से उन्हें सौंपने की अपील कर चुका है लेकिन भारत ने कहा है कि वह इस मसले पर विचार कर रहा है।

बांग्लादेश की सीआईडी ने कुल 286 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें शेख हसीना मुख्य आरोपी के रूप में नामित हैं। इनमें से 261 आरोपी अदालती समन का जवाब न देने के कारण फरार घोषित कर दिए गए हैं। ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट-17 के जज आरिफुल इस्लाम ने गुरुवार को इस आशय का आदेश जारी किया था, जिसके बाद 31 अक्टूबर को 'अमर देश' और 'द डेली स्टार' जैसे प्रमुख दैनिक अखबारों में यह नोटिस प्रकाशित किया गया। नोटिस में सभी 261 फरार आरोपियों के नाम, पते और अदालत में 11 नवंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया गया है।

क्या है मामला?

यह मामला 19 दिसंबर 2024 को एक जूम मीटिंग से जुड़ा है, जिसमें जॉय बांग्ला ब्रिगेड नामक समूह का गठन किया गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस समूह के सदस्यों ने बांग्लादेश के वैध अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रची थी। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सर्वरों और सोशल मीडिया से एकत्रित डेटा का फोरेंसिक विश्लेषण शामिल है। आरोपियों पर देशभर में समन्वित डिजिटल अभियान चलाकर भड़काऊ बयानबाजी की गई, जिससे हिंसा भड़काने और सिविल वॉर छेड़ने की कोशिश की गई। समूह के सदस्यों ने कथित तौर पर शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद पर बहाल करने के लिए आखिरी सांस तक लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया था।

सीआईडी के सहायक पुलिस अधीक्षक एम. एनामुल हक ने शिकायत दर्ज कराई थी। कोर्ट ने पहले 24 आरोपियों को गिरफ्तार घोषित किया था, जबकि शेष 262 (जिनमें से एक को बाद में छूट मिली) के लिए समन जारी करने का आदेश दिया था। यह नोटिस जारी करने का प्रक्रियागत कदम सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने, संपत्ति जब्ती, यात्रा प्रतिबंध और प्रत्यर्पण प्रयासों को सुगम बनाने के लिए उठाया गया है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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