नमाज पढ़ते हुए दफन हुई महिला, सम्मान के साथ निकाला शव; म्यांमार के लोगों का दिल जीत रही भारतीय सेना

भाषा, मांडले
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  • जो लोग मदद स्वीकार करने में झिझक रहे थे, अब वे आभार जताते थक नहीं रहे हैं। भूकंप उस समय आया जब मुस्लिम पवित्र महीने रमजान के अंतिम जुमे पर अलविदा की नमाज अदा कर रहे थे।

Indian Army winning Myanmar people hearts

म्यांमार में पिछले शुक्रवार को 7.7 तीव्रता का भूकंप आने के बाद से भारत के पड़ोसी देश की दुनिया ही उजड़ गई है। मदद को पहुंची भारतीय टीम विपरीत परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य को अंजाम दे ही रही है। इसके साथ ही भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीम स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान कर उनका दिल भी जीत रही है। इसी का उदाहरण मांडले में मलबे से एक शव को निकालते समय देखने को मिला।

नमाज पढ़ते हुए दफन हुई महिला

मलबे में फंसे शव को देखकर प्रतीत होता था कि महिला और उसका बच्चा उस समय भूकंप की चपेट में आ गए जब वे नमाज पढ़ रहे थे। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों ने पूर्व शाही राजधानी मांडले में स्ट्रीट 86ए के पास इस आपदा स्थल पर स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शव निकालने से कदम पीछे खींच लिए।

सम्मान के साथ निकाला शव

एनडीआरएफ के एक सदस्य ने बताया, ‘‘लेकिन समय गुजरने के साथ ही शव सड़ने लगा था। परिजनों को एहसास हुआ कि शव को पूरी तरह से निकालने के लिए उनके पास विशेषज्ञता का अभाव है, इसलिए वे हिचकिचाने लगे। उनकी शुरुआती अनिच्छा बाद में अपील में बदल गई।’’ उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ कर्मियों ने अपना कार्य पुनः शुरू किया, महिला के शव को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला तथा नमाज की उसकी अंतिम मुद्रा की गरिमा को बनाए रखा।

मौके पर मौजूद एनडीआरएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘जो लोग मदद स्वीकार करने में झिझक रहे थे, अब वे आभार जताते थक नहीं रहे हैं।’’ म्यांमार में एनडीआरएफ खोज एवं बचाव अभियान दल के उप टीम लीडर डिप्टी कमांडर कुणाल तिवारी ने बताया कि टीम को शव प्रबंधन में प्रशिक्षित किया गया है। आदम हुसैन (65) ने बताया कि भूकंप उस समय आया जब मुस्लिम पवित्र महीने रमजान के अंतिम जुमे (शुक्रवार) पर अलविदा की नमाज अदा कर रहे थे।

NDRF personnel conduct a rescue operation

डेल्टा सेक्टर को संभाल रही भारतीय टीम

राहत और बचाव कार्यों के लिए मांडले शहर को चार सेक्टरों- अल्फा, ब्रावो, चार्ली और डेल्टा में बांटा गया है। स्थानीय अधिकारियों ने डेल्टा को भारत को आवंटित किया है, जबकि अन्य तीन सेक्टरों को चीन, रूस और म्यांमार अग्निशमन सेवा विभाग द्वारा संभाला जा रहा है। एनडीआरएफ टीम ने मांडले में आवंटित 15 कार्यस्थलों में से 11 पर अभियान शुरू किया है और अब तक लगभग 30 शवों को निकाला है। हुसैन ने कहा, ‘‘हम भारत द्वारा किए गए प्रयासों से बहुत संतुष्ट हैं। मेरी बेटी, जो गंभीर रूप से घायल हो गई थी, उसका भारतीय सेना द्वारा स्थापित फील्ड अस्पताल में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया है।’’

भारतीय सेना ने बनाया फील्ड अस्पताल

बुजुर्ग व्यक्ति ने भावुक होकर भारतीय बचावकर्मियों की प्रशंसा की। भारतीय सेना ने शहर में एक फील्ड अस्पताल भी स्थापित किया है। इसके संचालन के पहले दो दिनों में लगभग 200 रोगियों का इलाज किया गया है, जिनमें से 34 को आगे की देखभाल के लिए भर्ती कराया गया है। साठ पैरा फील्ड अस्पताल के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल ने बताया, ‘‘स्थानीय लोग अस्पताल के बारे में जानने के बाद से ही यहां आ रहे हैं। भूकंप पीड़ितों के अलावा अन्य लोग भी इलाज के लिए आ रहे हैं और हम खुशी-खुशी उनका इलाज कर रहे हैं।’’

स्थानीय निवासी 25 वर्षीय उमर मलिक ने कहा, ‘‘भारतीय हमारी मदद कर रहे हैं। हम मलबे में अपने परिवार के सदस्यों की तलाश कर रहे हैं। इस कठिन समय में हमारी सहायता करने के लिए हम भारतीयों के आभारी हैं।’’ म्यांमार और उसके पड़ोसी थाइलैंड में भूकंप गत शुक्रवार (रमजान महीने के आखिरी जुमे) को आया था और अकेले म्यांमा में भूकंप से 3000 से अधिक लोगों की मौत हुई है।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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