US के आगे झुकेगा ईरान? शांति वार्ता में हॉट लाइन पर जुड़े थे ट्रंप, 21 घंटे में 12 बार हुई बात

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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यह वार्ता केवल उपराष्ट्रपति तक सीमित नहीं थी। वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिका की पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस कूटनीतिक दबाव का हिस्सा थी। उन्होंने बातचीत के दौरान निम्नलिखित शीर्ष अधिकारियों के साथ निरंतर परामर्श किया।

US के आगे झुकेगा ईरान? शांति वार्ता में हॉट लाइन पर जुड़े थे ट्रंप, 21 घंटे में 12 बार हुई बात

Iran-US Peace Talk: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई हाई लेवल वार्ता भले ही किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन इस शांति वार्ता ने एक मैसेज जरूर दिया है। इस शांति वार्ता ने अमेरिका के सियासी गलियारों की हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान से इसके संकेत मिले हैं। वेंस ने इस बात का खुलासा किया कि 21 घंटे तक चली इस मैराथन वार्ता के दौरान वे लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हॉट लाइन पर संपर्क में थे। वेंस के अनुसार, वाशिंगटन से राष्ट्रपति ट्रंप केवल निर्देश ही नहीं दे रहे थे, बल्कि वे वार्ता की हर बारीक अपडेट पर नजर रख रहे थे।

पत्रकारों के साथ बातचीत में जेडी वेंस ने बताया कि बातचीत के दौरान राष्ट्रपति के साथ उनका संवाद निरंतर बना रहा। उन्होंने कहा, "मैं सटीक संख्या तो नहीं बता सकता, लेकिन पिछले 21 घंटों में हमारी राष्ट्रपति से शायद आधा दर्जन या दर्जन भर बार बात हुई।"

यह वार्ता केवल उपराष्ट्रपति तक सीमित नहीं थी। वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिका की पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस कूटनीतिक दबाव का हिस्सा थी। उन्होंने बातचीत के दौरान निम्नलिखित शीर्ष अधिकारियों के साथ निरंतर परामर्श किया। उनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एडमिरल कूपर जैसे नाम शामिल हैं।

वेंस ने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी टीम का एक साथ सक्रिय होना इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका नेक नीयत के साथ बातचीत की मेज पर बैठा था।

उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका ने अपना सर्वश्रेष्ठ और अंतिम प्रस्ताव ईरान के सामने रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह तेहरान को तय करना है कि वह इन शर्तों को स्वीकार कर शांति का रास्ता चुनता है या नहीं।

आक्रामक ट्रंप प्रशासन

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस बार काफी आक्रामक और संगठित कूटनीति अपना रहा है। वार्ता में वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री की सक्रियता का मतलब है कि प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और सुरक्षा गारंटी जैसे पेचीदा मुद्दे शामिल हैं, जिन पर राष्ट्रपति ट्रंप खुद अंतिम फैसला ले रहे हैं।

क्या होगा अगला कदम?

फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लाबाद से रवाना हो रहा है, लेकिन उन्होंने तेहरान को सोचने के लिए समय दिया है। वेंस के बयानों से स्पष्ट है कि यदि ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकराया तो इसका मतलब केवल वार्ता की विफलता नहीं होगी, बल्कि अमेरिका की पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सामूहिक प्रयास को चुनौती देना होगा। अब पूरी दुनिया की नजरें तेहरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या वह ट्रंप प्रशासन की इन सख्त और समन्वित शर्तों के आगे झुकेगा या क्षेत्र में तनाव का एक नया दौर शुरू होगा?

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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