युद्ध हुआ तो पाक के सामने ठहर पाएगा अफगानिस्तान? कहां से हथियार लाता है तालिबान
तालिबान के पास हल्के हथियारों की कमी नहीं है लेकिन उसके पास वायुसेना नहीं है। इस मामले में वह पाकिस्तान से मात खाता है। हालांकि तालिबानी लड़ाके गुरिल्ला युद्ध में काफी निपुण हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब कोई नई बात नहीं रह गई है। आए दिन दोनों देश सीमावर्ती इलाके में भिड़ जाते हैं। हालांकि इस बार मामला ज्यादा ही आगे बढ़ गया है। पाकिस्तान ने पहले एयरस्ट्राइक की। इसका जवाब देने के लिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के बॉर्डर वाले इलाके में बमबारी की तो भड़के पाक ने काबुल तक हवाई हमले कर दिए। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुले युद्ध का ऐलान कर दिया है। ऐसे में कतर की मध्यस्थता में कराया गया युद्धविराम धरा का धरा रह गया।
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने नंगरहार, पकतीका और खोस्त में हमला करके टीटीपी के ठिकानों को तबाह किया है। उसने दावा किया है कि इन हमलों में 80 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। वहीं अफगानिस्तान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान नागरिकों को निशाना बना रहा है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को पनाह देता है और उसके जरिए पाकिस्तान में हमले करवाता है।
अफगानिस्तान की सैन्य शक्ति
अफगानिस्तान के पास लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की कमी है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।हालांकि तालिबान के पास अमेरिकी सेना के छोड़े हुए हथियार बहुत हैं। इसके अलावा तालिबान ब्लैक मार्केट से भी हथियार हासिल करता है। तालिबान लड़ाके पाकिस्तान के खिलाफ हलके हथियारों का ही इस्तेमाल करते हैं। उनके पास लंबी दूरी तक वार करने वाले हथियार ना के बराबर हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने पिछली सरकार को 16 लाख से ज्यादा हल्के और भारी हथियार दिए ते। इसमें से 70 फीसदी हथियार आज तालिबान के कब्जे में है। तालिबान के पास इस समय अमेरिकी एम-16, एम-4, एम-29 और क्लाश्निकोव हैं। उसके पास पीके एम-2, एम-240 जैसी मशीन गनें हैं। ग्रेनेड लॉन्चर के अलावा एटी-4 जैसी एंटी टैंक मिसाइलें भी हैं। तालिबान के पास 122 एमएम हॉवित्जर गन भी हैं। उसने बगराम एयरबेस पर हथियारं का प्रदर्शन किया था जिसमें स्कड मिससाइल आर-17 और एल्ब्रोस आर-300 दिखाई गई थी।
इस मामले में पिछड़ गया अफगानिस्तान
अफगानिस्तान अगर पाकिस्तान से मात खाता है तो केवल वायुसेना के मामले में। उसके पास वायुसेना है ही नहीं। तालिबान के पास हवा में मार करने वाले हथियार नहीं हैं। तालिबान ने अमेरिका के जिन विमानों को कब्जे में लिया था उनमें सी 208. एमडी 530 हेलिकॉप्टर, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर. ए -29 येयरक्राफ्ट, एमआई-17 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर और एमडी-500 लाइट अटैक हेलिकॉप्टर हैं।
तालिबान के पास एक प्लस पॉइंट है कि उसके लड़ाके गुरिल्ला युद्ध में निपुण हैं। अगर जमीन पर युद्ध होता है तो इस मामले में पाकिस्तान की सेना उसका मुकाबला नहं कर सकती है। तालिबान के पास मौजूद हल्के हथियार गुरिल्ला युद्ध में कारगर साबित होते हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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