अंग्रेजी पर इतना पैसा और समय क्यों? मैथ टीचर ने उठाया सवाल तो चीन में मचा बवाल
चीन में अंग्रेजी की पढ़ाई पर नई बहस छिड़ गई है। गणित शिक्षक तांग जियाफेंग का कहना है कि अंग्रेजी को स्कूलों और कॉलेजों का मुख्य विषय नहीं रहना चाहिए।

चीन में अंग्रेजी पढ़ाई पर नई बहस छिड़ी है। सवाल यह है कि स्कूलों और कॉलेजों में अंग्रेजी को कितना महत्व दिया जाए। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह चर्चा गणित शिक्षक और सोशल मीडिया पर मशहूर तांग जियाफेंग की बातों से तेज हुई है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को अब प्राथमिक स्कूल, हाई स्कूल और विश्वविद्यालयों में मुख्य विषय नहीं माना जाना चाहिए। तांग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैं सार्वजनिक रूप से मांग करता हूं कि अंग्रेजी का मुख्य विषय वाला दर्जा खत्म किया जाए। दुनिया में कोई भी देश अंग्रेजी को उतना ऊंचा स्थान नहीं देता, जितना हम देते हैं। उनका तर्क है कि बच्चे, माता-पिता और स्कूल इस भाषा पर बहुत समय और पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि ज्यादातर लोगों की नौकरी में इसकी जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन कई लोग इस मांग का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अंग्रेजी आज भी विज्ञान, शोध और दुनिया से जुड़ने के लिए जरूरी है।
बता दें कि तांग छात्रों को राष्ट्रीय स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कराते हैं। उनका कहना है कि बच्चे, माता-पिता और स्कूल अंग्रेजी सीखने में बहुत समय और पैसा खर्च कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि हमारे बच्चे, माता-पिता और स्कूल एक ऐसे विषय पर इतना संसाधन और समय क्यों लगा रहे हैं, जो आगे चलकर ज्यादातर लोगों की नौकरी में काम नहीं आएगा? उन्होंने यह भी कहा कि कई बच्चों को अपनी मातृभाषा ठीक से आने से पहले ही अंग्रेजी सीखने के लिए मजबूर किया जाता है। तांग ने आगे कहा कि हमारे बच्चे अपनी मातृभाषा पूरी तरह सीखने से पहले ही अंग्रेजी पढ़ना शुरू कर देते हैं। हम हजारों साल पुरानी सभ्यता हैं। अंग्रेजी सिर्फ एक साधन है। इसे जरूरत भर इस्तेमाल कर पाना काफी है। पश्चिमी संस्कृति की नकल करने की आदत अब बंद होनी चाहिए।
अंग्रेजी पर चर्चा क्यों?
दरअसल, ये बातें उस समय आई हैं, जब कुछ स्थानीय परीक्षाओं में इतिहास के अंक कम किए गए हैं। तांग का कहना है कि इतिहास बच्चों को पुरानी पीढ़ियों की मुश्किलें समझने और अच्छे मूल्य सीखने में मदद करता है। अगर किसी विषय का महत्व कम करना है, तो इतिहास की जगह अंग्रेजी का महत्व कम करना चाहिए। फिलहाल चीन में अंग्रेजी, चीनी भाषा और गणित के साथ प्राथमिक शिक्षा का मुख्य विषय है। इसे तीसरी कक्षा से पढ़ाया जाता है।
गाओकाओ नाम की बड़ी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में चीनी, गणित और अंग्रेजी तीनों के 150-150 अंक होते हैं। कुल 750 अंकों में अंग्रेजी का हिस्सा बड़ा है। यही कारण है कि अंग्रेजी की इस मजबूरी से निजी ट्यूशन का बड़ा कारोबार भी चल निकला है। तांग का तर्क है कि इससे प्रतिभाशाली विज्ञान और गणित के छात्रों को नुकसान हो सकता है। वे अपने विषय में अच्छे होने के बावजूद अंग्रेजी में कमजोर रह सकते हैं। लेकिन उनके प्रस्ताव का विरोध भी हुआ है।
क्या बोले ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक
सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक हू जिजिन ने कहा कि अंग्रेजी को मुख्य विषय से हटाना बहुत संकीर्ण सोच है। उन्होंने कहा कि आज का समय वैश्वीकरण का है। चीन का खुलापन सिर्फ सरकारी नीति नहीं है। इससे लोगों के काम और जीवन के मौके भी बढ़ते हैं। हू का कहना है कि अंग्रेजी छात्रों को चीन के बाहर ज्ञान और अवसर देती है। अगर सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी कम पढ़ाई गई, तो अमीर परिवार निजी कोचिंग ले लेंगे। गरीब छात्रों के मौके कम हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा में हर बच्चे को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। यह विदेशी चीजों की पूजा नहीं है। यह शिक्षा में बराबरी का सवाल है।


