पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते थे मोजतबा खामेनेई, फिर क्या फंसा पेच
मोजतबा खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। असल में ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की अपने पिता एवं पूर्ववर्ती आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की मांग खारिज कर दी है।
मोजतबा खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। असल में ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की अपने पिता एवं पूर्ववर्ती आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की मांग खारिज कर दी है। सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि इजरायल या तो उनकी हत्या कर देगा या फिर उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने का उपयोग उनके छिपने के ठिकाने का पता लगाने के लिए करेगा। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के दो अज्ञात सदस्यों और अंतिम संस्कार समारोह आयोजन से जुड़े एक व्यक्ति का हवाला देते हुए
28 फरवरी से ही नहीं आए नजर
जानकारी के मुताबिक मोजतबा ने नौ जुलाई को मशहद में अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने और पारंपरिक अंतिम संस्कार की रस्में निभाने के लिए धार्मिक सुरक्षा प्रहरियों से अनुमति मांगी थी। लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने हालांकि उनकी सुरक्षा चिंताओं के कारण अब तक इस अनुरोध की अनुमति नहीं दी है। ईरान की राजनीति में रहस्यमयी शख्सियत रहे मोजतबा ने अपने पिता के शासनकाल में परदे के पीछे रहकर काम करने वाले की भूमिका निभाई थी। गत 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद से न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनके बारे में कुछ सुना गया है। इस हमले में उनके पिता के साथ-साथ कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गये थे, जबकि मोजतबा के बारे में रिपोर्ट थी कि वे इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गये थे और संभवतः उनका चेहरा विकृत हो गया है। इस हमले में उनकी पत्नी और बेटे की भी जान चली गई थी।
ठिकाने को लेकर गहराया राज
रिपोर्ट के अनुसार, वह इस सप्ताह की शुरू में तेहरान में अपनी पत्नी के लिए आयोजित शोक सभा में भी अनुपस्थित रहे थे। इससे उनकी स्थिति और वर्तमान ठिकाने को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। जनता के बीच से उनकी लगातार अनुपस्थितिने उनके नेतृत्व की स्थिरता को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट में ईरान के चार वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि उनके लंबे समय से गायब रहने के कारण राजनीतिक प्रतिष्ठान के भीतर अनिश्चितता और गहरा गई है। मोजतबा केवल लिखित संदेश ही भेज रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर अमेरिका से बातचीत की इजाजत दे दी थी, हालांकि ईरान के कट्टरपंथियों ने यह जिद पकड़ रखी है कि जब तक वह कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं करते या कोई ऑडियो संदेश नहीं देते, तब तक वे कूटनीति का विरोध करना जारी रखेंगे।
खामेनेई की विरासत के लिए आंतरिक संघर्ष
इस बीच कट्टरपंथियों ने उन ईरानी वार्ताकारों पर मुकदमा चलाने और यहां तक कि उन्हें मौत की सजा देने की मांग की है। जबकि ये वार्ताकार ईरान के रूढ़िवादी खेमे के भीतर के ही नरमपंथी धड़े से आते हैं। अब ये दोनों गुट दिवंगत खामेनेई की विरासत पर अपना दावा ठोकने के लिए एक भीषण आंतरिक संघर्ष में उलझ गए हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ वाले इस नरमपंथी खेमे का ईरान के फैसलों पर बड़ा प्रभाव है।
यह दोनों नेता देश की चरमराई अर्थव्यवस्था संभालने के लिए अमेरिका से बातचीत का समर्थन करने के लिए सर्वोच्च नेता को मनाने में सफल रहे हैं। रिपोर्ट में जिन ईरानी अधिकारियों का जिक्र है, उनके अनुसार, अंतिम संस्कार समारोहों के बाद होने वाली आगामी वरिष्ठ नियुक्तियां अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत दे सकती हैं कि वर्तमान में किस राजनीतिक धड़े को सर्वोच्च नेता का समर्थन प्राप्त है।
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Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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