स्कूल-दफ्तर बंद, चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती; सड़कें भी सील, पाक में क्यों लॉकडाउन से हालात
Lockdown Conditions In Islamabad: राजधानी की सड़कों को सील कर दिया गया है। खासकर उन सड़कों को जो रेड जोन की तरफ जाती हैं और जहां-जहाँ सरकार की अहम इमारतें स्थित हैं। स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में दो दिनों की छुट्टी घोषित कर दी गई है।

Lockdown Conditions In Islamabad: पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गयी है और उसे किले में तब्दील कर दिया गया है। आलम यह है कि सिर्फ इस्लामाबाद में 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा राजधानी की सड़कों को सील कर दिया गया है। खासकर उन सड़कों को जो रेड जोन की तरफ जाती हैं और जहां-जहाँ सरकार की अहम इमारतें स्थित हैं। अधिकारियों ने स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। इसके अलावा जगह-जगह तलाशी केंद्र बनाए गए हैं।
दरअसल, पाकिस्तान को संदेह है कि इजरायल इस शांति वार्ता के बेपटरी कर सकता है और उसमें बाधा डाल सकता है। इसलिए पाकिस्तान ने ये तैयारियां की हैं। इसी सिलसिले में पाक गृह मंत्रालय में एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जो हर पहलू पर बारीकी से नजर रख रहा है। सुरक्षा उपायों के तहत, इस्लामाबाद रेंज के पुलिस आईजी के निर्देश पर विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया है। इसके अलावा पुलिस ने शहर के प्रवेश और निकास द्वारों पर विशेष चौकियां भी स्थापित की हैं, जबकि सभी गश्ती इकाइयां और विशेष दस्ते पूरे शहर में गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय से सटा हुआ 'सेरेना होटल' को पूरी तरह सील कर दिया है। यह वही होटल है, जहां अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता करेंगे।
ईरान -अमेरिका में होनी है शांति वार्ता
यह बातचीत पश्चिम एशिया में छह हफ़्ते तक चले युद्ध के बाद पहली बार हो रही है। इस युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए हैं और वैश्विक तेल बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और उनके विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल हैं। इन सभी के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपनी टीम की पुष्टि नहीं की है, हालाँकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरानी पक्ष का नेतृत्व करेंगे।
शांति वार्ता का क्या मकसद?
दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मकसद एक नाज़ुक युद्ध विराम को मज़बूत करना, सीजफायर में लेबनान को शामिल करने को लेकर मतभेदों को सुलझाना और होर्मुज़ समुद्री मार्ग को फिर से खोलना है। होर्मुज़ मार्ग दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल के हालिया हमलों (जिनमें कम से कम 303 लोग मारे गए) ने तनाव बढ़ा दिया है और इस बातचीत को और मुश्किल बना दिया है।
ईरान ने 10-सूत्रीय योजना पेश की है
वाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के एक-दूसरे से अलग प्रस्तावों के बीच कोई बीच का रास्ता निकालना है। ईरान ने 10-सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें उसके क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु संवर्धन के अधिकारों को मान्यता देने की बात शामिल है। वहीं, ख़बरों के मुताबिक, अमेरिका के पास 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव है, जिसमें परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की मांग की गयी है। इस बातचीत का नतीजा न सिर्फ़ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ारों की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने जेडी वेंस को क्यों भेजा? क्या रणनीति?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी सूझ-बूझ से वेंस को बातचीत की अगुवाई करने के लिए आगे किया है। ऐसा करने का पहला मकसद यह संदेश देना है कि यह कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह से गंभीर है। इसके ज़रिए उन्होंने अपने सहयोगी देशों, विरोधी ताकतों और आम जनता को यह साफ़ संकेत दिया है कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को खत्म करने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है, न कि सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए बातचीत कर रहा है। दूसरा मकसद यह है कि अगर ये बातचीत नाकाम रहती है या युद्ध विराम खत्म हो जाता है, तो ट्रंप यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने अपने प्रशासन के सबसे ज़्यादा एहतियात बरतने वाले वरिष्ठ अधिकारी को ही इस संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने का मौका दिया था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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