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क्यों डोनाल्ड ट्रंप का यह संकल्प बढ़ा रहा चीन की टेंशन, पनामा नहर पर जंग को भी तैयार!

क्यों डोनाल्ड ट्रंप का यह संकल्प बढ़ा रहा चीन की टेंशन, पनामा नहर पर जंग को भी तैयार!

संक्षेप:

  • ट्रंप ने तीखे लहजे में कहा, 'सबसे बड़ी बात है कि पनामा नहर का संचालन चीन कर रहा है। हम इसे चीन को नहीं सौंप सकते। हमने इसे पनामा को दिया था। अब हम इसे वापस लेंगे।' यही नहीं पनामा नहर को वापस लेने के लिए उन्होंने सैन्य बल के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया।'

Jan 21, 2025 01:17 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेने के साथ ही पनामा नहर को वापस लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस नहर का संचालन चीन कर रहा है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए डोनाल्ड ट्रंप ने इसके साथ ही 1999 के अंत में पनामा नहर ट्रांसफर करने की डील पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे अमेरिका का नुकसान हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने तीखे लहजे में कहा, 'सबसे बड़ी बात है कि पनामा नहर का संचालन चीन कर रहा है। हम इसे चीन को नहीं सौंप सकते। हमने इसे पनामा को दिया था। अब हम इसे वापस लेंगे।' यही नहीं पनामा नहर को वापस लेने के लिए उन्होंने सैन्य बल के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया। वह कई बार कनाडा, मेक्सिको और पनामा नहर का मसला उठा चुके हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप का बयान तब आया है, जब कई बार पनामा की ओर से भी खारिज किया जा चुका है कि इसका इस्तेमाल चीन नहीं कर रहा। फिर भी अमेरिकी राष्ट्रपति इस मसले पर आक्रामक हैं और उनका कहना है कि वह किसी भी तरह से इस पर चीन का कंट्रोल नहीं रहने दे सकते। अमेरिका की ओर से सौंपे जाने के बाद से अब तक पनामा का ही इस नहर पर फुल कंट्रोल रहा है। लेकिन अब अमेरिका उसकी संप्रभुता छीनते हुए पनामा नहर को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। डोनाल्ड ट्रंप ने तो साफ कहा कि 1999 में जिस डील के तहत पनामा नहर का नियंत्रण पनामा को दिया गया, वह मूर्खतापूर्ण गिफ्ट था। जो देना ही नहीं चाहिए था। इसे लेकर 1977 में राष्ट्रपति जिमी कार्टर के नेतृत्व में एक समझौता हुआ था।

अब सवाल यह है कि आखिर 82 किलोमीटर लंबी और 90 मीटर चौड़ी इस नहर को लेकर इतना हंगामा क्यों बरपा है। इसकी वजह है कि यह नहर कैरेबियन सागर और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। यह दुनिया के कारोबार को संचालित करने का एक अहम रूट है। पूरी दुनिया का करीब 6 फीसदी कारोबार यहीं से होता है। यह एक अहम ट्रेड रूट और ग्लोबल मैरिटाइम ट्रैफिक का मार्ग का है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस अहम हिस्से पर अमेरिका पर अपना पूरा नियंत्रण चाहता है। बीते कुछ सालों में यह चर्चा रही है कि पनामा नहर के संचालन में चीन का रोल बढ़ा है। यह बात अमेरिका को अखरती है। हालांकि पनामा का कहना है कि उसने चीन को कोई नियंत्रण नहीं दिया है। अब भी उसका ही पनामा कैनाल पर पूरा कंट्रोल है। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने एक्स पर ट्रंप को यह जवाब दिया है।

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उन्होंने लिखा, 'पनामा नहर हमें किसी से गिफ्ट में नहीं मिली है। हमारी कई पीढ़ियों के संघर्ष का यह परिणाम है, जो 1999 में फलीभूत हुआ था। टोरिजॉस और कार्टर के बीच हुई ट्रीटी से यह हुआ था। तब से अब तक बीते 25 सालों में हमने इसका अच्छे से संचालन किया है और वैश्विक कारोबार में मदद पहुंचाई है। इससे अमेरिका को भी फायदा हुआ है।' माना जा रहा है कि इस नहर पर अमेरिका का कब्जा हुआ तो यह चीन के लिए टेंशन वाली बात होगी और वह एक अहम व्यापारिक मार्ग खोने के करीब होगा।

Surya Prakash

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