BNP के हाथों जमात की हार या व्यापार? शहबाज शरीफ क्यों नहीं गए बांग्लादेश

Feb 17, 2026 12:07 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारों के हवाले से बताया जा रहा है कि जमात-ए-इस्लामी के सरकार में नहीं आने के बाद पाकिस्तान का रुख ढाका को लेकर बदला है। बहरहाल, आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया। वहीं, इसकी एक वजह व्यापार को भी माना जा रहा है।

BNP के हाथों जमात की हार या व्यापार? शहबाज शरीफ क्यों नहीं गए बांग्लादेश

बांग्लादेश की सियासत अब BNP बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी संभालने जा रही है। मंगलवार को प्रधानमंत्री पद पर तारिक रहमान समेत कैबिनेट के अन्य सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। खास बात है इस आयोजन के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी न्योता दिया गया था, लेकिन उन्होंने सरकार के मंत्री को भेजा। कहा जा रहा है कि जमात-ए-इस्लामी के सरकार में नहीं आना शरीफ के कार्यक्रम से दूरी बनाने की एक वजह हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर दोनों मुल्कों की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारों के हवाले से बताया जा रहा है कि जमात-ए-इस्लामी के सरकार में नहीं आने के बाद पाकिस्तान का रुख ढाका को लेकर बदला है। बहरहाल, आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया। वहीं, इसकी एक वजह व्यापार को भी माना जा रहा है।

हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय ऑस्ट्रिया के दौरे पर हैं। उन्होंने सोमवार को विएना में चांसलर क्रिश्चियन स्टोकर से मुलाकात की थी।

पाकिस्तान के राजनीतिक जानकार कमर चीमा ने एक यूट्यूब वीडियो में कहा, 'अगर एक बात बताऊं अगर ये 12 13 मुल्कों में से कोई भी ना जाए वहां पर जो कि पाकिस्तान का वजीर आजम भी नहीं जाएगा। ठीक है?' उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का वजीर आजम पहले यह देखना चाहते हैं कि आप हमें क्या ऑफर कर रहे हैं। मेरा आकलन यह है।' उन्होंने कहा कि यह अहम है।

'मोहम्मद यूनुस नहीं आए पाकिस्तान'

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान को भी क्या ऑफर करेंगे अभी, क्योंकि पाकिस्तान के अंदर भी ये एक थोड़ा इंप्रेशन है यार ये डेढ़ पौने दो साल जो है ना वो मोहम्मद यूनस पाकिस्तान नहीं आए।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगता है कि अभी हमें इस चीज में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें (पाकिस्तान) को भी कुछ भरोसा चाहिए कि आप बात करने के लिए हमारे साथ क्या लाए हैं...।'

बांग्लादेश को बताया सभी के लिए चुनौती

चीमा ने कहा, 'देखिए, बांग्लादेश सभी के लिए एक चुनौती बन चुका है। वहां पर इकोनॉमी का उनका एक आंतरिक मसला है। बाहर भारत के साथ मसले हैं। पाकिस्तान के साथ पुराने 50 सालों को रिसेट करना है। चीन को बताना है कि आप कहां खड़े हैं।' उन्होंने कहा कि भारत ने ईयू ट्रेड के जरिए बांग्लादेश की इकोनॉमी पर 'स्ट्राइक' की हुई है।

उन्होंने कहा, 'सिर्फ उनपर ही नहीं, हमारे ऊपर भी है। हम मैनेज कर लेते हैं...।'

बांग्लादेश चुनाव

13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं और मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नसीरुद्दीन ने संसद भवन (जातीय संसद भवन) में सांसदों को पद की शपथ दिलाई। निवर्तमान स्पीकर शिरीन शरमिन चौधरी के इस्तीफे के कारण यह शपथ संवैधानिक विकल्प के तहत कराई गई।

भारत को भी था न्योता

पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर एहसान इकबाल बांग्लादेश पहुंच थे। वहीं भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिरकत की थी। बांग्लादेश ने भारत और पाकिस्तान के अलावा जिन अन्य देशों को आमंत्रित किया है, उनमें चीन, सऊदी अरब, यूएई, तुर्किये, कतर, ब्रुनेई, मलेशिया, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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