Ali Khamenei: क्यों अमेरिका के जानी दुश्मन बन गए थे अली खामेनेई? आखिरी दम तक देते रहे टक्कर
Ali Khamenei: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच ईरान ने 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया है। खामेनेई अमेरिका की आंखों में खटकते थे। इसकी मुख्य वजह इजरायल और ईरान का परमाणु कार्यक्रम था।

Ali Khamenei: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि कर दी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि अली खामेनेई के मारे जाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने ईरानियों से सत्ता की बागडोर संभालने को कहा है। वहीं खामेनेई के कार्यालय ने कहा है कि यह केवल एक तरह का मानसिक युद्ध का हथकंडा है। ईरान ने खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि नहीं की है। ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार शाम को 'रेड क्रिसेंट' के हवाले से बताया कि कम से कम 201 लोग मारे गए हैं और 700 से अधिक घायल हुए हैं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे तथा हमले रातभर जारी रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एनबीसी न्यूज से कहा कि ''जहां तक मुझे पता है'', खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जीवित हैं और उन्होंने इस हमले को ''अकारण, अवैध और पूरी तरह से अनुचित'' बताया।
ईरान में पहले से ही खामेनेई की विरोध
1979 की इस्लामिक क्रांति के बड़े चेहरे रहे अली खामेनेई की विरोध लंबे अरसे से चल रहा था। ईरान में 13 दिन बेहद तेज प्रदर्शन हुए थे। इस्लामिक क्रांति के दौरान अली खामेनेई ने तत्कालीन किंग शाह मोहम्मद रजा पहवी को गद्दी से उतार दिया था। इसके बाद रूहल्ला खोमेनी ईरान के पहले सु्प्रीम लीडर बन गए थे। 1989 में खुमैनी की मौत के बाद खामेनेई सुप्रीम लीडर बने।
कौन थे अली खामेनेई?
86 साल के अली खामेनेई अमेरिका के जानी दुश्मन बन गए थे। अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर का बपद संभाला था। खुमैनी ने 1979 की इस्लामिक क्रांति का नेतृत्व किया था। खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम सर्वोच्च शक्ति उन्हे ही प्राप्त थी।
क्यों बन गए अमेरिका के जानी दुश्मन
अमेरिका की नजरों में अली खामेनेई हमेशा ही खटकते थे। खामेनेई ने पश्चिमी देशों और अमेरिका से कभी अच्छे संबंध नहीं रखे। इसकी मुख्य वजह इजरायल भी है। वहीं अली खामेनेई की मुख्य ताकत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स थे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से अमेरिका के साथ उसके संबंध अच्छे नहीं थे। हालांकि ईरान का कहना था कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है। खामेनेई भी कहते थे कि वह परमाणु शक्ति का इस्तेमाल हथियार बनाने में नहीं कर रहे हैं।
खामेनेई ने ही ईरान में पैरामिलिट्री सिस्टम बनाया था। यह सिस्टम ईरान कीसीमाओं के बाहर और अंदर भी सुरक्षा करता था। सुन्नी मुसलमानों में खामेनेई काफी लोकप्रिय थे। अली खामेनेई की जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ था। उनके पिता मौलवी थे। उन्होंने कोम से एडवांस्ड इस्लामिक स्टडीज पूरी की। वह अयातुल्लाह रूहोल्लाह से बहुत प्रभावित थे। 1960 के दशक में खामेनेई कई बार जेल भी गए। वह शाह के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होते थे। 1979 में वह रिवोल्यूशनरी काउंसल के सदस्य बने। ईरान और इराक युद्ध के दौरान वह ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। खोमैनी की मौत के बाद वह 36 साल तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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