Hindi Newsविदेश न्यूज़Why China Angry So Much on America Attack on Venezuela Oil is Main Reason
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से इतना तमतमाया क्यों है चीन, क्या है गुस्से की असल वजह

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से इतना तमतमाया क्यों है चीन, क्या है गुस्से की असल वजह

संक्षेप:

पिछले साल वेनेजुएला का लगभग 80 फीसदी तेल को चीन भेजा गया था। यह अभी भी देश के तेल इंपोर्ट का सिर्फ चार फीसदी है। वेनेजुएला पर चीन का लगभग दस बिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन भी बकाया है।

Jan 07, 2026 06:18 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, बीजिंग
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वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले ने दुनियाभर के कई देशों को दो धड़े में बांट दिया है। एक धड़ा जो अमेरिका की इस कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है तो चीन, रूस जैसे तमाम देश अमेरिका के इस ऐक्शन पर सवाल उठा रहे हैं। चीन अमेरिका पर काफी तमतमाया दिखाई दे रहा है और इसकी असल वजह तेल और व्यापारिक रिश्ते हैं, जो दशकों से बीजिंग और काराकास की दोस्ती का कारण बने हुए हैं।

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चीन का कहना है कि अमेरिका की यह मांग कि वेनेजुएला तेल सेक्टर में एक एक्सक्लूसिव पार्टनरशिप बनाए, यह एक दादागिरी वाला काम है और लैटिन अमेरिकी देश की संप्रभुता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में पत्रकारों से कहा, "वेनेजुएला एक संप्रभु देश है और उसके पास अपने तेल संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों पर पूरी स्थायी संप्रभुता है।"

माओ ने आगे कहा, "वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका द्वारा खुलेआम ताकत का इस्तेमाल करना और देश से अपने तेल संसाधनों को संभालते समय अमेरिका का पक्ष लेने के लिए कहना, यह एक आम दादागिरी वाला काम है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है।" प्रवक्ता ने आगे कहा, "मैं इस बात पर जोर देना चाहती हूं कि वेनेजुएला में चीन और दूसरे देशों के जायज अधिकार हैं, जिनकी रक्षा की जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि बीजिंग और काराकास के बीच सहयोग समझौते दो संप्रभु देशों के बीच साइन किए गए हैं और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों कानूनों द्वारा सुरक्षित हैं।

वेनेजुएला का दूसरा बड़ा ट्रेड पार्टनर चीन

चीन और रूस, ऐसे दो बड़े देश हैं, जिनसे वेनेजुएला के बहुत अच्छे संबंध हैं। चीन, अमेरिका के बाद वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार लगभग $7 बिलियन का है। चीन और वेनेजुएला के बीच संबंध व्यापार पर काफी टिका है। बीबीसी के अनुसार, चीन को तेल चाहिए था, जबकि वेनेजुएला को कैश। 2000 से 2023 के आस-पास बीजिंग ने वेनेजुएला को रेलवे, पावर प्लांट और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए $100 बिलियन से ज्यादा दिए। इसके बदले में, काराकास ने बीजिंग को वह तेल दिया जिसकी उसे अपनी बढ़ती हुई इकॉनमी को चलाने के लिए जरूरत थी।

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वेनेजुएला का 80 फीसदी तेल सिर्फ चीन को

पिछले साल वेनेजुएला का लगभग 80फीसदी तेल को चीन भेजा गया था। यह अभी भी देश के तेल इंपोर्ट का सिर्फ चार फीसदी है। वेनेजुएला पर चीन का लगभग दस बिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन भी बकाया है। एनर्जी एनालिटिक्स फर्म वोरटेक्सा के अनुसार, 2025 के दौरान इंपोर्ट लगभग 470,000 bpd तक पहुंच गया। 'टीपॉट्स' के नाम से जाने जाने वाले छोटे इंडिपेंडेंट रिफाइनर डिस्काउंटेड वेनेजुएला के कच्चे तेल के मुख्य चीनी खरीदार हैं। वेनेजुएला से तेल का इतना बड़ा व्यापार होने की वजह से भी बीजिंग और काराकास के बीच इतने करीबी संबंध हैं।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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