मौत, धमकियां और गालियां: पाकिस्तान में महिला टिकटॉकर्स की जान इतनी सस्ती क्यों है?
आयशा के जनाजे में कम लोगों के आने का सोशल मीडिया पेजेस पर जिस तरह मजाक उड़ाया गया, वह इस समाज की उस कड़वी हकीकत को दिखाता है जहां किसी महिला की जिंदगी और उसकी कामयाबी को कभी दिल से कबूल नहीं किया जाता।

क्या पाकिस्तान में महिलाओं का सोशल मीडिया पर होना उनकी जान का दुश्मन बन गया है? यह सवाल एक बार फिर गूंज रहा है, और वजह है 28 साल की मशहूर टिकटॉक क्रिएटर शमसो बीबी की सरेआम हत्या, जिन्हें इंटरनेट पर 'आयशा गिलामना' के नाम से जाना जाता था। 14 अगस्त को हुई इस वारदात ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में महिला इन्फ्लुएंसर्स के लिए हालात कितने खौफनाक हो चुके हैं।
दिनदहाड़े सड़क पर कत्ल
आयशा गिलामना टिकटॉक पर काफी लोकप्रिय थीं। करीब तीन-चार सालों की मेहनत से उन्होंने 13 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बनाए थे। यूट्यूब पर भी उनके लाखों सब्सक्राइबर थे। 14 अगस्त की उस मनहूस शाम को काशिफ नाम के एक शख्स ने उन्हें फोन कर घर से बाहर बुलाया। आयशा अपनी 15 साल की बहन असीमा और भाई नेमतुल्लाह के साथ कार से निकलीं। तक्षशिला शहर में एक पेट्रोल पंप के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने उनकी कार पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
एक गोली सीधे आयशा की गर्दन में लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। गोलीबारी के कारण कार बेकाबू होकर दूसरी गाड़ी से टकरा गई, जिससे उनकी छोटी बहन भी बुरी तरह घायल हो गई।
पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और CCTV फुटेज खंगाल रही है। फुटेज में 30-35 साल के दो हमलावर वारदात के बाद बाइक से भागते दिख रहे हैं। हालांकि, आयशा के परिवार का सीधा आरोप है कि यह हत्या पैसों के लेन-देन को लेकर हुई है।
पिता फजल साहिबजादा के मुताबिक, आयशा ने कौसर और जावेद (शाहीन) नाम के दो लोगों से अपने पैसे वापस मांगे थे। इसके बाद से उसे लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं और उसने इस्लामाबाद में इसकी आधिकारिक शिकायत भी दर्ज कराई थी। परिवार का कहना है कि आयशा की आवाज दबाने और पैसे हड़पने के लिए उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
टिकटॉकर्स के लिए खौफ का माहौल
आयशा की मौत कोई इकलौती घटना नहीं है; यह उस खूनी सिलसिले की ताजा कड़ी है जिसका शिकार कई महिला कंटेंट क्रिएटर्स हो चुकी हैं। इसी साल जून में 17 साल की टिकटॉकर सना युसूफ को इस्लामाबाद में उसके घर के अंदर गोली मार दी गई थी। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने उमर हयात नाम के एक बेरोजगार युवक से बात करने से मना कर दिया था। बाद में कातिल को 21 साल की सजा तो हुई, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग सना को ही कोसते नजर आए। किसी ने लिखा, "जैसी करनी वैसी भरनी," तो किसी ने कहा कि वह "इस्लाम को बदनाम कर रही थी।"
यह सिर्फ कुछ सिरफिरे लोगों का काम नहीं है, बल्कि एक गहरी सामाजिक बीमारी है। फेसबुक पर महिलाओं का एक बड़ा ग्रुप चलाने वाली कंवल अहमद कहती हैं, "यह सिर्फ एक पागल आदमी की करतूत नहीं है, यह एक कल्चर बन गया है। पाकिस्तान की हर महिला इस डर को जानती है। चाहे आप टिकटॉक पर हों या इंस्टाग्राम पर आपके सिर्फ 50 फॉलोअर्स हों, मर्द आपके इनबॉक्स और कमेंट्स में आपको डराने पहुंच ही जाते हैं।"
आंकड़े भी इस बात की खौफनाक गवाही देते हैं। जनवरी 2025 में क्वेटा में एक पिता ने अपनी बेटी को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसने अपना टिकटॉक अकाउंट डिलीट करने से मना कर दिया था। पिता का तर्क था कि वीडियो बनाने से उनके 'सम्मान' को ठेस पहुंची है। पिछले साल अक्टूबर में कराची में एक आदमी ने 'अश्लील' टिकटॉक वीडियो बनाने के आरोप में अपने घर की चार महिलाओं का कत्ल कर दिया। साल 2016 में मशहूर सोशल मीडिया सेलिब्रिटी कंदील बलोच की उसके ही भाई द्वारा की गई 'ऑनर किलिंग' आज भी लोगों के जेहन में ताजा है।
औरतें अपनी मर्जी से जिएं, तो बर्दाश्त नहीं
महिला अधिकारों के लिए काम करने वालीं फरजाना बारी इस पूरी मानसिकता को बेहद साफ शब्दों में समझाती हैं। उनका कहना है, "अगर कोई महिला अपनी मर्जी से फैसले ले रही है या किसी आदमी के कंट्रोल से बाहर निकल रही है, तो उसे कुचलने के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है।"
साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही पाकिस्तान में 700 से ज्यादा महिलाओं की हत्या हो चुकी है। इनमें से एक चौथाई मामले 'ऑनर किलिंग' यानी झूठी शान की खातिर की गई हत्या के हैं।
सबसे ज्यादा दुख की बात यह है कि सोशल मीडिया की जिस दुनिया में ये महिलाएं अपना मुकाम बनाती हैं, वही दुनिया उनकी मौत के बाद सबसे ज्यादा बेरहम हो जाती है। स्वतंत्र पत्रकार अम्मारा अहमद ने आयशा की मौत के बाद फैलाई जा रही नफरत पर कड़ा ऐतराज जताते हुए लिखा, "पाकिस्तानी महिलाओं को मौत के बाद भी कोई सम्मान नहीं मिलता।"
आयशा के जनाजे में कम लोगों के आने का सोशल मीडिया पेजेस पर जिस तरह मजाक उड़ाया गया, वह इस समाज की उस कड़वी हकीकत को दिखाता है जहां किसी महिला की जिंदगी और उसकी कामयाबी को कभी दिल से कबूल नहीं किया जाता।


