कौन थीं किरणदीप कौर? जिनकी लंदन में बेरहमी से कर दी गई हत्या; सो रही थीं, तभी चाकुओं से गोदा

लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
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भारतीय मूल की 24 वर्षीय महिला किरणदीप की लंदन में घर में सोते समय चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। परिजनों ने नस्लीय हिंसा के आरोप लगाए हैं।

Kirandeep Kaur

भारतीय मूल की एक महिला की इंग्लैंड की राजधानी लंदन में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है। किरणदीप कौर नाम की यह महिला मूल रूप से पंजाब के तरनतारन जिले की रहने वाली थी, जो पश्चिमी लंदन के हेस इलाके में अपने पति और बच्चे के साथ रहती थी। उसकी उम्र 24 साल थी। करीब दो साल पहले वह स्टूडेंट वीजा पर उच्च शिक्षा के लिए लंदन गई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे वर्क परमिट मिल गया था और वह वहीं रहकर नौकरी कर रही थी।

यह वारदात तब हुई जब वह अपने घर पर सो रही थीं। तभी एक व्यक्ति उनके घर में घुस आया। उसने सोती हुई किरणदीप पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए। किरणदीप के पति को बी घर के बाहर घायल अवस्था में पाया गया, जिन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दंपति का एक नवजात बच्चा भी है, जो कुछ दिन पहले ही जन्मा है। लेकिन उसकी हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। हमलवार घर के बाहर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था।

पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार किया

उसके आधार पर लंदन पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। UK पुलिस ने इस हमले के सिलसिले में 44 साल के डेनियल शॉन जेम्स को गिरफ़्तार किया है। कैमरे में कैद हमलावर का हुलिया संदिग्ध व्यक्ति से मेल खाता है। मेट्रो UK के अनुसार, आरोपी को ऐसी चोटें आई थीं जो खिड़की से कूदने पर लग सकती हैं। भारत में किरणदीप कौर के परिवार ने बताया कि उन्हें शक है कि हमलावर उनके बेडरूम में घुसा और धारदार हथियार से हमला किया; उन्हें लगता है कि यह नस्लीय हमला था।

जांच जारी

पुलिस ने हमलावर जेम्स पर हत्या की कोशिश और धारदार हथियार रखने का आरोप लगाया है। वह मंगलवार को विल्सडेन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुआ। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि अभी इस घटना को 'हेट क्राइम' (नफ़रत से प्रेरित अपराध) मानने का कोई सबूत नहीं है और जांचकर्ता खुले दिमाग से हर पहलू की जांच कर रहे हैं।

कौन थीं किरणदीप कौर

किरणदीप लगभग दो साल पहले स्टूडेंट वीज़ा पर UK गई थीं। बाद में उन्हें वर्क परमिट मिल गया और वह वहीं रह और काम कर रही थीं। मेट्रो के अनुसार, उनके माता-पिता, सुखदेव सिंह और बलजीत कौर ने ब्रिटेन में उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पंजाब के तरनतारन ज़िले में अपनी सारी खेती की ज़मीन बेच दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि बाद में वह विदेश में बसने में अपने भाई-बहनों की मदद करेंगी। उनकी मौत के बाद, दुखी माता-पिता ने सरकार से उनके शव को भारत वापस लाने में मदद करने और UK अधिकारियों से दोषियों को सज़ा दिलाने की अपील की है।

एक समर्पित माँ

कौर के ने उन्हें एक समर्पित माँ के तौर पर याद किया। उन्होंने कहा, "उन्हें अभी बच्चा हुआ था। परिवार बहुत खुश था। हम गहरे सदमे में हैं। वह एक बेहतरीन माँ थीं।" पड़ोसी रूबी ने भी कौर को एक मिलनसार और देखभाल करने वाली युवा माँ बताया, जो अपने नवजात बच्चे से बहुत प्यार करती थीं। उन्होंने मेट्रो को बताया, "वह सच में बहुत अच्छी थीं, हमेशा मुस्कुराने वाली और मिलनसार। मैं सोच भी नहीं सकती कि ऐसा क्यों हुआ होगा। रात में मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया, लेकिन सुबह होते ही हर तरफ़ पुलिस ही पुलिस थी।"

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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