Hindi Newsविदेश न्यूज़Who was Anne Franks sister Holocaust survivor died at the age of 96
कौन थीं हिटलर के 'मौत के दरवाजे' से बच निकलने वाली एनी फ्रैंक की बहन? 96 साल की उम्र में निधन

कौन थीं हिटलर के 'मौत के दरवाजे' से बच निकलने वाली एनी फ्रैंक की बहन? 96 साल की उम्र में निधन

संक्षेप:

बेलसन कैंप में एनी फ्रैंक का पूरा परिवार खत्म हो गया लेकिन उनके पिता बच गए थे। इसी तरह इवा का भी परिवार खत्म हो गया और उनकी मां बच गईं। बाद में इवा की मां ने एनी फ्रैंक के पिता से शादी कर ली। इवा ऑस्त्विच यातना शिविर से बच निकली थीं।

Jan 05, 2026 04:39 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर ने यहूदियों का जिस तरह से नरसंहार किया और उन्हें यातनाएं दीं, उसकी कहानी जाकर भी रूह कांप उठती है। दूसरे विश्वयुद्ध की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है जिसे 'एनी फ्रैंक का धोखा' नाम से जाना जाता है। एनी फ्रैंक होलोकॉस्ट में सबसे चर्चित पीड़ित थीं। उनके एक करीबी ने ही फ्रैंक को परिवार सहित धोखा देकर पकड़वा दिया था। उन्होंने एक डायरी लिखी जिसको बाद में 'द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' के नाम से प्रकाशित किया गया । मात्र 15 साल की उम्र में ही एनी की मौत हो गई। उनकी एक सौतेली बहन इवा स्क्लॉस की 96 साल की उम्र में सोमवार को मौत हो गई है। इवा स्क्लॉस भी लंबे समय तक हिटलर के बनाए ऑस्त्विच यातना शिविर में रहीं। हालांकि रूस के हमले के बाद वह बच गईं।

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मौत का दरवाजा

जानकारी के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाजियों के यातना शिविरों में करीब 10 लाख लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज्यादातर यहूदी ही थे। ऑस्त्विच के यातना शिविर को 'मौत का दरवाजा कहा जाता है। कहा जाता है कि नाजी लोग जब बंदियों को यातना शिविर में ले जाते थे तो उनके बाल तक काट लेते थे ताकि वे किसी भी तरीके से कपड़े ना बना सकें।

एनी फ्रैंक की सौतेली बहन इवा लंदन में एनी फ्रैंक ट्रस्ट चलाती थीं। ब्रिटेन के महाराज किंग चार्ल्स थर्ड ने इस ट्रस्ट को बनाने में मदद की थी। हिटलर के यातना शिविर से बचने के बाद इवा ने ठान लिया था कि बाकी बचा हुआ जीवन वह लोगों की मदद करने और ऐसा काम करने में बिताएंगी जिससे नफरत कम हो और प्रेम को बल मिले।

इवा का जन्म 1929 में विएना में हुआ था। ऑस्ट्रिया पर नाजियों के कब्जे के बाद वे भागकर ऐम्सटर्डम चले गए। वहीं इवा की दोस्ती एी से हुई थी। फ्रैंक की तरह इवा का परिवार भी दो साल तक यातना शिविर में रहा। 1945 में जब रूस की सेना ने शिविर से बंदियों को छुड़वाया तो इवा और उनकी मां की जान बच गई। उनके परिवार के बाकी लोग यातना शिविर में मारे गए थे। इवा के पिता भी ऑस्त्विच में ही मारे गए थे। 1953 में इवा की मां फ्रिजी ने एनी फ्रैंक के पिता से शादी कर ली। एनी फ्रैंक की मौत बेलसन बेलसन कैंप में पहले ही हो चुकी थी।

इवा ने लगभग एक दशक तक यातना शिविर के बारे में किसी से बात ही नहीं की। वह युद्ध की उस विभीषिका से बाहर ही नहीं आ पा रही थीं। ऐसे में वह ज्यादातर चुप ही रहती थीं। 1986 में एनी फ्रैंक एग्जिबिशन शुरू होने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह नई पीढञी को नाजियों के अत्याचार के बारे में बताएँगी। इसके बाद उन्होंने यातना शिविर के बारे में बताना शुरू किया। इवा ने पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें

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