समुद्र पर किसका अधिकार? ईरान का जहाज डूबने के बाद अंतरराष्ट्रीय नियमों पर उठे बड़े सवाल
श्रीलंका के तट के पास ईरान शिप को डुबाने के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर पड़े सवाल उठ रहे हैं। किसी देश के तट से 12 नॉटिकल मील तक उस देश की सीमा मानी जाती है। इसके बाद 200 नॉटिकल मील तक EEZ होता है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध के बीच समंदर में तेल के जहाजों पर खतरा मंडरा रहा है। ईरान और अमेरिका ने कई जहाजों क निशाना बनाया है। श्रीलंका के तट के पास ईरान के नेवल शिप IRIS डेना के डूबने के बाद बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि आखिर समंदर का बादशाह कौन है? इस घटना के बाद ना केवल श्रीलंका बल्कि भारत की भी टेंशन बढ़ गई है। हिंद महासागर में ही इस पोत को निशाना बनाया गया है। कोलंबो ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।
जानकारी के मुताबिक श्रीलंका की नेवी ने 32 ईरानी सेलर को बयाया है। अब भी कम से कम 148 लोग लापता हैं। श्रीलंका की नौसेना तेजी से उन्हें ढूंढने की कोसिश कर रही है। श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीमेलाही ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "ईरानी जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, क्योंकि उनके पास किसी भी प्रकार के हथियार नहीं थे।"
श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत 'देना' को टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया। यह पोत विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग लेने के बाद लौट रहा था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी दुश्मन पोत को टॉरपीडो से हमला करके डुबाने की पहली घटना बताया। फताली ने कहा, ''कुछ देशों ने कहा है कि वे बातचीत के लिए कुछ प्रतिनिधि भेजना चाहते हैं, लेकिन हमारा मानना है कि इस समय कोई भी बातचीत इस क्षेत्र के लिए उपयोगी नहीं है, और ईरान के लिए तो बिल्कुल भी नहीं, क्योंकि उन्होंने ही युद्ध शुरू किया था।' उन्होंने कहा, ''हम विजयी होंगे और हमें जीत मिलेगी। अमेरिका और यहूदी शासन के प्रति हमारा यही रुख है। अब तक हम युद्ध की स्थिति में हैं, लेकिन हमारे देश की संस्थाएं काम करना जारी रखे हुए हैं।'
समंदर पर किसका नियंत्रण?
यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन लॉ ऑफ द सीज (UNCLOS) के मुताबिक किसी भी देश का समुद्र पर नियंत्रण उसके तट से 12 नॉटिकल मील तक होता है। इस क्षेत्र में जल और आकाश दोनों जगह उसका अधिकार होता है। इस सीमा के अंदर कोई भी देश अपनी सेना को रख सकता है। इसके अलावा बिना किसी व्यवधान के मछळी पकड़ सकते हैं। इस सीमा में आने के लिए विदेशी जहाजों को अनुमति लेनी पड़ती है।
इसके अलावा नियमों में कहा गया है कि तट से 200 नॉटिकल मील तक एक्सक्लूजिक इकनॉमिक जोन होता है। इस सीमा में खनिजों पर उसका अधिकार होता है। हालांकि इस सीमा में विदेशी पोत भी आ-जा सकते हैं और इसके लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती है। ईरान पर ऐसे समुद्री क्षेत्र में हमला हुआ है जिसपर किसी देश का नियंत्रण नहीं है। यह क्षेत्र सभी देशों के जहाजों और फिशिंग बोट के लिए खुला है। इसे ''ग्लोबल कॉमन' के नाम से जाना जाता है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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