क्या मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से कैंसर होता है? ताजा रिसर्च आई सामने

Feb 04, 2025 12:41 pm ISTNiteesh Kumar वार्ता
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  • शोध के मुताबिक, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। शोध में मोबाइल, ल्यूकेमिया और मुंह के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।

क्या मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से कैंसर होता है? ताजा रिसर्च आई सामने

क्या मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से कराए गए ताजा शोध में इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया की परमाणु एवं विकिरण सुरक्षा एजेंसी (ARPANSA) की ओर से रिसर्च की गई। इसमें मोबाइल फोन के इस्तेमाल और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है। डब्ल्यूएचओ की ओर से कराए गए और मंगलवार को प्रकाशित शोध के मुताबिक, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। शोध में मोबाइल और ल्यूकेमिया, लिम्फोमा व थायरॉयड और मुंह के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।

गौरतलब है कि यह एआरपीएएनएसए की ओर से की गई दूसरी डब्ल्यूएचओ-कमीशन व्यवस्थित समीक्षा है। सितंबर 2024 में प्रकाशित पहली रिपोर्ट में मोबाइल फोन के उपयोग और मस्तिष्क व अन्य सिर के कैंसर के बीच संबंध की खोज की गई। इस दौरान कोई संबंध नहीं पाया गया था। दोनों अध्ययनों के मुख्य लेखक व एआरपीएएनएसए में स्वास्थ्य प्रभाव आकलन के सहायक निदेशक केन कारिपिडिस ने अधिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए शोध में मोबाइल फोन, टावरों और कैंसर के बीच संबंध पर सभी उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया है।

शोधकर्ताओं ने क्या पाया नतीजा

डायरेक्टर केन ने बताया, 'शोधकर्ताओं को रेडियो तरंगों के संपर्क और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं मिला। मगर, टीम मस्तिष्क कैंसर पर समीक्षा की तुलना में परिणामों के बारे में उतनी निश्चित नहीं हो सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन कैंसर और वायरलेस तकनीक से रेडियो तरंगों के संपर्क के बीच संबंध पर उतने साक्ष्य नहीं हैं।' अध्ययन में योगदान देने वाले एआरपीएएनएसए के वैज्ञानिक रोहन मेट ने बताया कि निष्कर्ष वायरलेस तकनीक और कैंसर के बारे में जनता को सूचित करने के लिए ज्ञान के भंडार में वृद्धि करेंगे। दोनों व्यवस्थित समीक्षाएं रेडियो तरंगों के संपर्क से स्वास्थ्य प्रभावों पर ताजा आकलन को सूचित करेंगी, जिसे डब्ल्यूएचओ तैयार कर रहा है।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें

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