कश्मीर मूल, ऑक्सफोर्ड एडुकेटेड; ब्रिटेन की पहली मुस्लिम PM बनने की दावेदार शबाना महमूद कौन?
लेबर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। कई रिपोर्ट्स और चर्चाओं में गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। अगर कीर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं या पार्टी उन्हें हटाती है, तो शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं। आइये जानते हैं कि शबाना महमूद?

जेफ्री एपस्टीन फाइल्स के खुलासे से ब्रिटेन की राजनीति में तूफान मचा हुआ है। नए दस्तावेजों के सामने आने से प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर दबाव बढ़ता जा रहा है, और उनके चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने रविवार को इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाने के विवाद से जुड़ा है, जिनके जेफ्री एपस्टीन से पुराने संबंधों का नाम फाइल्स में आया है।
इस संकट के बीच, लेबर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। कई रिपोर्ट्स और चर्चाओं में गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। अगर कीर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं या पार्टी उन्हें हटाती है, तो शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं।
कौन हैं शबाना महमूद?
45 वर्षीय शबाना महमूद पेशे से वकील हैं और लेबर पार्टी की मजबूत नेताओं में शुमार हैं। वह कीर स्टार्मर की करीबी मानी जाती हैं और पार्टी में प्रभावशाली वक्ता के रूप में जानी जाती हैं। वैचारिक रूप से उन्हें लेबर के दक्षिणपंथी (राइट विंग) धड़े से जुड़ा माना जाता है। वह बर्मिंघम की लेडीवुड सीट से लेबर सांसद हैं। उनका जन्म 1980 में बर्मिंघम में हुआ, जहां उन्होंने अपने जुड़वां भाई के साथ बचपन बिताया। उनका परिवार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर से संबंध रखता है। उन्होंने 2002 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिंकन कॉलेज से कानून की डिग्री ली और 2003 में इनस ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ से बार वोकेशनल कोर्स पूरा कर बैरिस्टर बनीं।
- शबाना महमूद लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं और 5 सितंबर 2025 से गृह विभाग में राज्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे यूनाइटेड किंगडम की लॉर्ड चांसलर और न्याय संबंधी राज्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
- पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश राजनीतिज्ञ शबाना महमूद का जन्म 1980 में बर्मिंघम में हुआ। उनके माता-पिता पाकिस्तानी-कश्मीरी पृष्ठभूमि से हैं और पीओके से ताल्लुक रखते हैं। महमूद पेशे से एक बैरिस्टर हैं और क्षतिपूर्ति कानून की विशेषज्ञ मानी जाती हैं।
- उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के लिंकन कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। यही वह कॉलेज है जहां ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र और राजनीति की शिक्षा प्राप्त की थी।
- शबाना महमूद 2010 के आम चुनाव में बर्मिंघम लेडीवुड निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। इस जीत के साथ वह ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला सांसदों में शामिल हो गईं। उन्होंने लगभग 55.7 प्रतिशत मतों के साथ यह सीट हासिल की।
- एक दशक बाद वर्ष 2023 में अंग्रेजी अखबार द स्टेट्समैन ने उन्हें ब्रिटेन की 20 सबसे प्रभावशाली वामपंथी हस्तियों में शामिल किया। इसी वर्ष लेबर पार्टी नेता कीर स्टारमर ने उन्हें न्याय के लिए छाया राज्य सचिव नियुक्त किया। स्टारमर के नेतृत्व में पार्टी के राष्ट्रीय चुनावी अभियानों के समन्वय में भी उनकी अहम भूमिका रही। इस दौरान उन्होंने 2021 में आयरलैंड में जन्मे राजनीतिक रणनीतिकार मॉर्गन मैकस्वीनी के साथ मिलकर काम किया।
- वर्ष 2024 में महमूद ने अपने राजनीतिक करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वे यूनाइटेड किंगडम के इतिहास की पहली मुस्लिम और तीसरी महिला लॉर्ड चांसलर बनीं। उसी वर्ष कीर स्टारमर ने उन्हें विदेश सचिव और लॉर्ड चांसलर के पद पर नियुक्त किया।
- महमूद ब्रिटेन में अवैध प्रवासन की मुखर आलोचक रही हैं। 2025 में उन्होंने संसद में शरणार्थी नीति में बदलाव का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवासन पर लगाम लगाना था। इस प्रस्ताव को धुर दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन का समर्थन भी मिला। उनके सुझाए गए सुधारों में अंगोला, नामीबिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के नागरिकों के लिए वीजा निलंबन जैसे कदम शामिल थे।
- बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने अवैध प्रवासन पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह समस्या 'देश को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में कानूनी रूप से इस देश में आए थे। यह मेरे लिए एक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ब्रिटेन की अवैध प्रवासन व्यवस्था को 'पूरी तरह टूटी हुई प्रणाली' करार दिया और स्पष्ट किया कि उनके बयान न तो दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं और न ही किसी तरह की फर्जी सूचनाओं पर आधारित हैं।
- महमूद ने 2013 में समलैंगिक विवाह का समर्थन किया था। हालांकि 2019 में उन्हें अपनी ही पार्टी के कुछ समर्थकों की आलोचना का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने संसद में यह तर्क दिया कि स्कूलों में LGBTQ विषयों से जुड़े RSE पाठ्यक्रम पढ़ाते समय छात्रों की धार्मिक पृष्ठभूमि और आयु-उपयुक्तता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में माता-पिता की सहमति को महत्व दिया जाना चाहिए।
- वर्ष 2024 में शबाना महमूद को प्रिवी काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया। यह परिषद यूनाइटेड किंगडम के संप्रभु को सलाह देने वाला एक महत्वपूर्ण निकाय है, जिसके सदस्य शपथ लेकर यह दायित्व निभाते हैं।
इस्तीफे के बाद मॉर्गन मैकस्वीनी ने क्या कहा?
चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने कहा कि 2024 में उन्होंने ही पीटर मैंडेलसन (72) को राजदूत बनाने की सलाह दी थी और वे इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। बयान में कहा कि यह फैसला गलत था। इससे पार्टी, देश और राजनीति में जनता का भरोसा टूटा है। मैंने प्रधानमंत्री को यह सलाह दी थी और मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। इससे पहले पीएम स्टार्मर ने माफी मांगी थी और कहा था कि मैंडेलसन के एपस्टीन संबंधों की जानकारी नहीं थी। इन सब के बीच कई सांसद उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्षी कंजर्वेटिव नेता केमी बडेनोच ने कहा कि स्टार्मर को अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेनी होगी।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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