कौन हैं निक स्टीवर्ट? जिन्हें ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का दिया जिम्मा, करवा पाएंगे समझौता

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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Donald Trump: ईरान के साथ बातचीत कर रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में निक स्टीवर्ट को शामिल किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निक को इस टीम में शामिल करने के पीछे ट्रंप के दामाद जेरेश कुशनर का हाथ है। दोनों ने ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान साथ में काम किया था।

कौन हैं निक स्टीवर्ट? जिन्हें ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का दिया जिम्मा, करवा पाएंगे समझौता

US Iran war latest update: अमेरिका और ईरान के बीच शांति के प्रयास जारी है। इसी बीच वाशिंगटन ने अपनी वार्ताकार टीम में एक और सदस्य को शामिल किया है। ईरान के साथ शांति के लिए बातचीत कर रही अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ, जेरेश कुशनर समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। इस लिस्ट में अब निक स्टीवर्ट को भी सलाहकार के रूप में शामिल किया गया है। बता दें, निक को ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई का समर्थक माना जाता है।

निक की नियुक्ति को लेकर अमेरिका समेत अन्य देशों में चर्चा जारी है। सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक वाइट हाउस ने निक की नियुक्ति की पुष्टि की है। वाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने निक स्टीवर्ट के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए उन्हें एक तेज-तर्रार और ईरान के मुद्दे पर एक अनुभवी नीति विशेषज्ञ करार दिया। वहीं, दूसरी तरफ ईरान के साथ वार्ता में शामिल अमेरिकी अधिकारियों ने भी निक का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्टीवर्ट के टीम में शामिल होने से उसके नीतिगत और सलाहकार पक्ष को मजबूती मिली है। इसकी वजह से संभव है कि यह मुद्दा जल्दी ही सुलझा लिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निक को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने का फैसला ट्रंप के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर ने लिया है। कुशनर और निक ने ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान साथ में मिलकर काम किया है, ऐसे में दोनों का एक-दूसरे के ऊपर भरोसा बना हुआ है।

कौन हैं निक स्टीवर्ट

वाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने निक स्टीवर्ट के बारे में ज्यादा जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निक को ईरान से संबंधित मामलों की गहरी समझ है। क्योंकि इससे पहले ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान वह अमेरिकी विदेश विभाग और कैपिटल हिल में काम कर चुके हैं। वर्तमान में निक फाउंडेसन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज से जुड़े हुए थे। बता दें, यह फाउंडेशन ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई का समर्थन करता है।

निक की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटीज स्कूल ऑफ इंटरनेशनल से पीस एंड कन्फ्लिक्ट स्टडीज, अरब स्टडीज में ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इंटरनेशल पॉलिटिक्स में एमफिल किया है।

बता दें, ईरान के साथ शांति बनाने की कोशिश कर रही अमेरिकी टीम में बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब दोनों तरफ से बयानबाजी तेज है। हालांकि, दोनों ही पक्ष अब फिर से हिंसा की तरफ आगे बढ़ने से परहेज करते हुए दिख रहे हैं। शांति के लिए अमेरिका की तरफ से एक प्रस्ताव दिया गया था। ईरान ने इसे मानने से साफ इनकार करते हुए अपना 14 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। ईरान चाहता है कि पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए इसी प्रस्ताव पर शांति वार्ता हो। लेकिन अमेरिका इस पर बात करने को भी तैयार नहीं है।

अस्थाई सीजफायर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगे बढ़ा चुके हैं। 28 फरवरी को ईरान में सत्ता परिवर्तन के सपने के साथ हमला करने वाले ट्रंप अब कैसे भी करके यहां से निकलने की कोशिश करते हुए नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान इस युद्ध को एक जीत की तरह पेश कर रहा है। इसलिए वह अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करना चाहता है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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