टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप? शुल्क लगाने के और भी हैं तरीके
सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ को रद्द करने के फैसले के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप के पास ऐसे विकल्प है कि वह टैरिफ की नीति लागू कर सकते हैं। धारा 301 के तहत किसी भी देश पर जांच के बाद असीमित टैरिफ लगाया जा सकता है। इसकी वैधता चार साल होती है जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 'टैरिफ' को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति के पास अब भी आयात पर आक्रामक तरीके से कर लगाने के विकल्प मौजूद हैं। जजों ने राष्ट्रपति के इस दावे को स्वीकार नहीं किया कि उन्हें मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है। लेकिन ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में इस्तेमाल की गई शुल्क संबंधी शक्तियों का फिर से उपयोग कर सकते हैं और महामंदी के समय से चली आ रही अन्य शक्तियों का भी सहारा ले सकते हैं।
टैरिफ खत्म होने का रास्ता नहीं
जॉर्जटाउन की व्यापार कानून की प्रोफेसर कैथलीन क्लॉसन ने कहा, "यहां टैरिफ खत्म होने का कोई रास्ता नजर नहीं आता। मुझे पूरा यकीन है कि वह अन्य अधिकारों का इस्तेमाल करके मौजूदा टैरिफ व्यवस्था को फिर से कायम कर सकते हैं।" ट्रंप ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत शुल्क लगाने के लगभग असीमित अधिकार का दावा किया था, लेकिन विरोधियों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तर्क दिया कि इस शक्ति की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि कांग्रेस ने कई अन्य कानूनों में व्हाइट हाउस को शुल्क लगाने की शक्ति सौंपी थी। हालांकि इसने राष्ट्रपति द्वारा इस अधिकार के उपयोग के तरीकों को सावधानीपूर्वक सीमित किया था।
कितना बढ़ गया अमेरिकी टैरिफ
दूसरे कार्यकाल में ट्रंप की विदेश और आर्थिक नीति का एक मुख्य आधार टैरिफ रहा है, जिसमें अधिकांश देशों पर दोहरे अंकों के "पारस्परिक" टैरिफ लगाए गए हैं, जिसे उन्होंने अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करके उचित ठहराया है। येल विश्वविद्यालय की बजट लैब द्वारा की गई गणनाओं के अनुसार, जब ट्रंप जनवरी में व्हाइट हाउस लौटे थे तब अमेरिका में औसत टैरिफ 2.5 प्रतिशत था। यह एक साल बाद बढ़कर लगभग 17 प्रतिशत हो गया है, जो 1934 के बाद से सबसे अधिक है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह है बड़ी ताकत
अमेरिकी संविधान में कर लगाने और शुल्क लगाने की शक्ति विशेष रूप से कांग्रेस को दी गई है, इसके बावजूद राष्ट्रपति ने अकेले ही ऐसा किया। अमेरिका के पास लंबे समय से उन देशों पर प्रहार करने का एक कारगर हथियार रहा है जिन पर वह "अनुचित," "अतार्किक" या "भेदभावपूर्ण" व्यापार तरीकों में लिप्त होने का आरोप लगाता है। यह 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 है। ट्रंप ने खुद भी इसका आक्रामक रूप से इस्तेमाल किया है।
इस धारा के तहत लगाया जा सकता है असीमित टैरिफ
धारा 301 के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ के आकार पर कोई सीमा नहीं है। इनकी वैधता चार साल बाद समाप्त हो जाती है, लेकिन इन्हें बढ़ाया जा सकता है। लेकिन प्रशासन के व्यापार प्रतिनिधि को अनुच्छेद 301 के तहत शुल्क लगाने से पहले एक जांच करनी होगी और आमतौर पर एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि धारा 301 चीन से निपटने में उपयोगी है। लेकिन ट्रंप द्वारा पारस्परिक टैरिफ के माध्यम से दंडित किए गए छोटे देशों से निपटने के मामले में इसकी कुछ कमियां हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा, "उन सभी देशों की दर्जनों 301 जांच करना एक बेहद कठिन प्रक्रिया है।"
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