मौत के समय क्या कर रहे थे खामेनेई, मोसाद ने ईरान में कैसे लगाई सेंध? ऑपरेशन की पूरी कहानी

Mar 01, 2026 09:44 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को सही ठहराते हुए कहा कि खामेनेई इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक थे और उनकी मौत ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा अवसर है।

मौत के समय क्या कर रहे थे खामेनेई, मोसाद ने ईरान में कैसे लगाई सेंध? ऑपरेशन की पूरी कहानी

ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई शनिवार सुबह तेहरान स्थित अपने कार्यालय में मारे गए। इस हमले में IRGC चीफ मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और अयातुल्ला खामेनेई के सीनियर सलाहकार अली शमखानी मारे गए हैं।

इजरायल के पूर्व प्रेसिडेंट अहमदीनेजाद के मुताबिक, ईरान की सीक्रेट सर्विस ने ईरान के अंदर मोसाद एजेंट्स को टारगेट करने के लिए एक यूनिट बनाई थी। लेकिन इस यूनिट का हेड खुद मोसाद का एक ऑपरेटिव निकला, साथ में 20 और एजेंट्स भी थे।

सरकारी टेलीविजन पर एक न्यूज एंकर ने रुंधे हुए गले और आंखों में आंसू लिए देश को सूचित किया कि ईरान अब 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक में प्रवेश करेगा। इस हमले ने न केवल ईरान की सत्ता को हिला दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक भीषण युद्ध की आग में झोंक दिया है। जिस समय इजरायल ने उन्हें मार गिराया, उस समय वह अपने दफ्तर में दैनिक काम कर रहे थे।

ऑपरेशन की कहानी

इजरायल के चैनल 12 के मुताबिक, खामेनेई की बॉडी की एक फ़ोटो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दिखाई गई। रिपोर्ट में बिना नाम वाले इजरायली अधिकारियों का जिक्र किया गया। पब्लिक ब्रॉडकास्टर कान ने यह भी बताया कि सीनियर इजरायली अधिकारियों को खामेनेई के खत्म होने की जानकारी दे दी गई थी और उनकी बॉडी तेहरान में उनके कंपाउंड के मलबे से मिली थी।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शनिवार सुबह शुरू हुए US-इजरायली हमलों में खमेनेई के साथ उनकी बेटी, पोता, बहू और दामाद भी मारे गए। ईरान के डिफेंस मिनिस्टर अजीज नसीरजादेह और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी हमलों में मारे गए हैं।

'रेड क्रिसेंट' के अनुसार, इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए इन हवाई हमलों में अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। बीबीसी और सीबीएस न्यूज की रिपोर्टों के मुताबिक, मरने वालों में कम से कम 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी शामिल हैं। BBC ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए खामेनेई के कार्यालय 'लीडरशिप हाउस' को हुए भारी नुकसान की पुष्टि की है। आईंआरजीसी (IRGC) से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि खामेनेई की अपने कार्यालय में मौजूदगी यह साबित करती है कि उनके छिपने की खबरें महज दुश्मन का मनोवैज्ञानिक युद्ध थीं।

ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले

खामेनेई की मौत के जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर चौतरफा हमले शुरू कर दिए हैं। दुबई, दोहा (कतर), बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों ने खाड़ी देशों में भारी दहशत पैदा कर दी है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

ट्रंप का आक्रामक रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को सही ठहराते हुए कहा कि खामेनेई इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक थे और उनकी मौत ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा अवसर है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि तेहरान पर अमेरिका की बमबारी अनवरत जारी रहेगी। दूसरी ओर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन अपने नागरिकों और क्षेत्रीय भागीदारों की सुरक्षा के लिए समन्वित क्षेत्रीय रक्षा अभियानों में हिस्सा ले रहा है।

ईरान के खिलाफ इस सीधे सैन्य अभियान ने अमेरिका के भीतर भी दरार पैदा कर दी है। अमेरिकी सांसद दलीय आधार पर बंटे हुए हैं, क्योंकि राष्ट्रपति ने कांग्रेस की पूर्व अनुमति के बिना युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इससे क्षेत्र में शांति की रही-सही उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं।

उत्तराधिकारी की तलाश: ईरान की असेंबली ऑफ लीडरशिप एक्सपर्ट्स (मौलवियों की परिषद) जल्द से जल्द खामेनेई के उत्तराधिकारी की घोषणा करने के लिए बैठक कर रही है। ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को IRGC की कमान सौंपी गई है, जो अब जवाबी हमलों का नेतृत्व कर रहे हैं। पूरे मध्य पूर्व में नागरिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिए गए हैं, जिससे हजारों यात्री फंसे हुए हैं।

मध्य पूर्व अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां से वापसी का रास्ता फिलहाल नजर नहीं आ रहा। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह संघर्ष विश्व युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति की कोई खिड़की खुलेगी।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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