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संयुक्त राष्ट्र का क्या है प्लान, ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस बनने के बाद क्या करेगा UN

संयुक्त राष्ट्र का क्या है प्लान, ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस बनने के बाद क्या करेगा UN

संक्षेप:

रूस, कनाडा, मिस्र, अर्जेंटीना, जॉर्डन, ब्राजील, पैराग्वे, भारत, पाकिस्तान, जर्मनी, फ्रांस, इटली, हिंगली, रोमेनिया, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, ग्रीस, मोरोक्को, स्लोवेनिया और पौलेंड को न्योता भेजा गया है। हालांकि, इस सूची में और भी देश शामिल हो सकते हैं।

Jan 21, 2026 11:11 am ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस को लेकर चर्चाएं जारी हैं। अब इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के जारी रहने की वकालत की है। इधर, यूएन भी वेट एंड वॉच की नीति पर काम करता नजर आ रहा है। ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान समेत करीब 60 देशों के नेताओं को बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है।

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र हमेशा कई संगठनों के साथ सह-अस्तित्व में रहा है। उप-प्रवक्ता फरहान हक ने सोमवार को कहा, 'दुनिया भर में क्षेत्रीय संगठन, उप-क्षेत्रीय संगठन और विभिन्न रक्षा गठबंधन मौजूद हैं। इनमें से कुछ के साथ हमारे संबंध भी हैं।'

हक ने कहा, 'कुछ संगठनों के साथ हमारे ऐसे संबंध नहीं हैं। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वास्तव में किस रूप में स्थापित होता है और उसका स्वरूप क्या होता है, यह देखने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि उसके साथ हमारा किस तरह का संबंध होगा।'

UN पर ट्रंप का क्या है प्लान

ट्रंप से जब एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया गया कि क्या वह चाहते हैं कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले तो ट्रंप ने कहा, 'यह हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र बहुत मददगार साबित नहीं हुआ है। मैं संयुक्त राष्ट्र की क्षमताओं का बड़ा समर्थक हूं, लेकिन यह कभी अपनी पूरी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाया।'

ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका ने हाल ही में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया है और मुझे लगता है कि यह वाकई शानदार साबित होने जा रहा है। अगर संयुक्त राष्ट्र ने अधिक कदम उठाए होते तो शायद इसकी जरूरत नहीं होती।' ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में आठ युद्धों को सुलझाया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने किसी भी युद्ध में उनकी मदद नहीं की।

ट्रंप ने कहा, 'मैं उन्हें दोष नहीं दे रहा हूं। मैंने उन्हें मदद के लिए फोन नहीं किया, लेकिन मैंने राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एक साथ बैठाया, हमने सख्ती से बात की, आपसी सहमति बनाई और वे मुझे पसंद करने लगे।'

उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र को उन सभी युद्धों को सुलझाना चाहिए था, जिन्हें मैंने सुलझाया। मैं उसका मदद के लिए कभी आह्वान नहीं किया। उन्हें वे प्रत्येक युद्ध सुलझाने चाहिए थे जो मैंने सुलझाया लेकिन उन्होंने वह नहीं किया। मेरा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र को जारी रहने देना चाहिए, क्योंकि इसकी क्षमता बहुत अधिक है।'

किन देशों को न्योता

रूस, कनाडा, मिस्र, अर्जेंटीना, जॉर्डन, ब्राजील, पैराग्वे, भारत, पाकिस्तान, जर्मनी, फ्रांस, इटली, हिंगली, रोमेनिया, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, ग्रीस, मोरोक्को, स्लोवेनिया, पौलेंड समेत कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, इस सूची में और भी देश शामिल हो सकते हैं। खबर है कि स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को 1 अरब डॉलर की फीस देनी होगी।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit
निसर्ग दीक्षित एक डिजिटल क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनकी राजनीति की गतिशीलता पर गहरी नजर है और वैश्विक और घरेलू राजनीति की जटिलताओं को उजागर करने का जुनून है। निसर्ग ने गहन विश्लेषण, जटिल राजनीतिक कथाओं को सम्मोहक कहानियों में बदलने की प्रतिष्ठा बनाई है। राजनीति के अलावा अपराध रिपोर्टिंग, अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां और खेल भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहे हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद दैनिक भास्कर के साथ शुरुआत की और इनशॉर्ट्स, न्यूज18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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