फारस में खाड़ी में ईरान के भीषण हमलों का क्या है मकसद, आसान भाषा में समझिए

Mar 05, 2026 08:07 pm ISTMadan Tiwari भाषा
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इसी बीच, ईरान ने तुर्किये पर मिसाइलें दागी हैं और ड्रोन ने अजरबैजान के क्षेत्र को निशाना बनाया है। ईरान की मूल रणनीति युद्ध के विस्तार के खतरों के बारे में भय पैदा करना है, ताकि अमेरिका के सहयोगी देश उस पर इतना दबाव डालें कि वह ईरान में अभियान रोक दे।

फारस में खाड़ी में ईरान के भीषण हमलों का क्या है मकसद, आसान भाषा में समझिए

कई वर्षों से, ईरान की सरकार चेतावनी देती रही है कि यदि उसे अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस हुआ तो वह पश्चिम एशिया को मिसाइलों और ड्रोन हमलों से दहला देगी। इस्लामी गणराज्य अब ठीक यही करता नजर आ रहा है। अमेरिका व इजराइल द्वारा शनिवार को युद्ध शुरू करने और ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद से, ईरान ने इजराइल, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूतावासों, तथा फारस की खाड़ी में ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाते हुए हजारों ड्रोन व बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

इसी बीच, ईरान ने तुर्किये पर मिसाइलें दागी हैं और ड्रोन ने अजरबैजान के क्षेत्र को निशाना बनाया है। ईरान की मूल रणनीति युद्ध के विस्तार के खतरों के बारे में भय पैदा करना है, ताकि अमेरिका के सहयोगी देश उस पर इतना दबाव डालें कि वह ईरान में अभियान रोक दे। एक लंबा संघर्ष, साथ ही अमेरिकी और इजराइली सैनिकों की जानमाल की हानि भी ईरान के पक्ष में काम कर सकती है। समस्या यह है कि पड़ोसियों पर हमला करने की रणनीति भी उलटी पड़ सकती है। क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने और खौफ पैदा करने का प्रयास

यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम की उप निदेशक एली गेरानमायेह ने कहा, "ईरान इस अमेरिकी सैन्य अभियान की लागत बढ़ा रहा है और इसे शुरू से ही क्षेत्रीय रंग दे रहा है, जैसा कि उसने वादा किया था कि अगर अमेरिका ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू करता है तो वह ऐसा करेगा।" ईरान के नेताओं का मानना ​​है कि जानमाल का नुकसान पहुंचाकर और ऊर्जा उत्पादन को बाधित करके तेल और गैस की कीमतों को बढ़ाकर, अमेरिका के सहयोगी या देश में असंतुष्ट जनता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव डालेगी कि वे अपनी नीतियों में ढील दें।

गेरानमायेह ने कहा कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा लगता है कि वह "बातचीत के जरिए समझौता करने के बजाय अपनी मांगों के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण" के लिए दबाव डाल रहे हैं। अमेरिका व इजराइल के मुकाबले कम हथियार होने के बावजूद, ईरान ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागना जारी रखा है, जिसमें 11 लोग मारे गए हैं और लाखों इजरायलियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खाड़ी अरब देशों में और भी अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि अमेरिका-इजराइल अभियान में ईरान में 1,045 लोगों की जान गयी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हुई कई वार्ताओं के विफल होने के बाद अमेरिका व इजराइल ने यह हमला किया।

ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उनके चार उद्देश्य हैं, ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसकी नौसेना को खत्म करना, उसे परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि वह सहयोगी सशस्त्र समूहों का समर्थन करना जारी न रख सके। ईरान की प्रतिक्रिया ने इस क्षेत्र में किसी को भी नहीं बख्शा, यहां तक ​​कि ओमान को भी नहीं, जिसने परमाणु वार्ता के नवीनतम दौर में मध्यस्थता की थी और दशकों से ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा है, क्योंकि उसने 1970 के दशक में दिवंगत सुल्तान काबूस बिन सईद को एक विद्रोह को दबाने में मदद की थी। पिछले सप्ताह, जब अमेरिका ने क्षेत्र में युद्धपोतों का जमावड़ा किया, तो ओमान के विदेश मंत्री परमाणु वार्ता को जारी रखने के अंतिम प्रयास में वाशिंगटन की ओर रवाना हुए।

तब से, ओमान इस संघर्ष में घसीटा गया है। ओमान के एक बंदरगाह और उसके तट से निकट स्थित जहाजों को ईरानी मिसाइलों द्वारा निशाना बनाया गया है। ओमान के दुक्म बंदरगाह ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत को तैनाती से पहले रसद संबंधी सहायता प्रदान की। सऊदी अरब, जिसने 2023 से तेहरान के साथ तनावमुक्त संबंध बनाए रखे हैं, इस सप्ताह भी निशाने पर आ गया। उसकी रास तनुरा रिफाइनरी को ईरान ने निशाना बनाया। कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी ईरानी हमलों की चपेट में रहे।

लंदन स्थित 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज' के पश्चिम एशिया विशेषज्ञ हसन अलहसन ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डालने, खाड़ी और पश्चिमी देशों के बीच फूट डालने और लागत बढ़ाने की ईरान की रणनीति "उल्टी पड़ रही है"। उन्होंने कहा, "यह खाड़ी देशों को अमेरिका के साथ अधिक निकटता से जुड़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित कर रहा है।"

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शॉर्ट बायो: लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।

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