क्या है JF-17 जेट? जिसे पाकिस्तान ने ईरान संकट के बीच सऊदी अरब में किया तैनात

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान संकट के बीच पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन 8000 सैनिकों के साथ सऊदी अरब में तैनात किया है। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इस दस्ते के साथ ही एक चीन निर्मित HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को भी सऊदी अरब भेजा गया है।

क्या है JF-17 जेट? जिसे पाकिस्तान ने ईरान संकट के बीच सऊदी अरब में किया तैनात

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पाकिस्तान ने रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में 8000 सैनिकों को तैनात किया है। पाकिस्तानी आर्मी के इन सैनिकों के अलावा शहबाज सरकार ने 16 JF-17 लड़ाकू जहाज और एक एयर डिफेंस सिस्टम भी सऊदी अरब की रक्षा के लिए भेजा है। बता दें, पाकिस्तान के इस पूरे डिफेंस सिस्टम को पाकिस्तानी अधिकारी ही संचालित कर रहे हैं, लेकिन पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत इसका पूरा खर्च सऊदी अरब उठा रहा है। पाकिस्तान के इस अभियान में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय जेएफ-17 बना है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है।

क्या है JF-17 फाइटर जेट?

पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाए गए इस हल्के फाइटर जेट को पाक वायुसेना बड़े स्तर पर प्रयोग करती है। इस फाइटर जेट को पाकिस्तान में जेएफ-17 थंडर और चीन में एफसी-1 सियोलोंग कहा जाता है।nइस फाइटर जेट ने अपनी पहली उड़ान 2003 में भरी थी। इसके बाद वर्ष 2007 में इसे पाकिस्तानी वायुसेना में शामिल किया गया।

इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी खासियत इसका रूसी मेड आरडी-93 फाइटर इंजन है, जो इसे मैक 1.6 करीब 19 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने की ताकत देता है। इसमें आधुनिक रडार और इलेक्ट्रिनिक वारफेयर सिस्टम का हिस्सा माना जाता है। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली चीनी मिसाइलें भी लगी हुई हैं।

पाकिस्तानी वायुसेना के मुताबिक जेएफ-17 थंडर के अभी तक तीन वेरिएंट सामने आए हैं। इसमें ब्लॉक 01 सबसे पहला शुरुआती मॉडल था। इसके बाद ब्लॉक2 में इसमें ईंधन क्षमता और एवियोनिक्स को बढ़ाया गया। इसे बाद सबसे आधुनिक रूप में इसका ब्लॉक 3 वर्जन आया है। इसमें इसके रडार सिस्टम को बेहतर किया गया है।

ईरान युद्ध में कितनी उपयोगिता

पाकिस्तान भले ही सऊदी अरब के साथ अपने पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत लड़ाकू विमान और सैनिकों को भेज चुका है। लेकिन इसके सीधे युद्ध में शामिल होने की संभावना नहीं है। क्योंकि इस समय पर पाकिस्तान अमेरिका और चीन के बीच में शांति वार्ता का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऐसे में संभव है कि वह युद्ध में सीधा न उलझे। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान ने सऊदी अरब की रक्षा के लिए लड़ाकू विमान भेजे हों। इससे पहले भी युद्ध के समय सऊदी अरब के तेल ढ़ांचों की रक्षा के लिए भेजा था।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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