बांग्लादेश में ISI क्या खिचड़ी पका रहा है? ढाका की खुफिया टीम पहुंची पाकिस्तान, भारत की चिंता बढ़ी
भारत की तरफ से निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद बांग्लादेश ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भागीदारी को लेकर अभी तक कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा है।

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच लगातार गहरी होती सैन्य और खुफिया साठगांठ ने दक्षिण एशियाई कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी DGFI (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस) के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 15 अगस्त को पाकिस्तान का दौरा किया है।
कर्नल मगफूज-उल-बारी के नेतृत्व में हुए इस दौरे को ढाका और इस्लामाबाद के बीच सुरक्षा संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य और खुफिया स्तर पर संपर्क तेजी से बढ़े हैं।
कूटनीतिक हलचल और समय का महत्व
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
भारत की तरफ से निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद बांग्लादेश ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भागीदारी को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में DGFI के महानिदेशक मेजर जनरल कैसर रशीद चौधरी ने भी इस्लामाबाद का दौरा किया था, जहां उन्होंने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी।
पाकिस्तान और बांग्लादेश के वायु सेना प्रमुखों के बीच पाकिस्तान निर्मित 'JF-17 थंडर' लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री को लेकर भी बातचीत हो चुकी है।
क्या भारत पर दबाव बनाने की रणनीति है?
पूर्व भारतीय राजदूत अनिल त्रिगुणायत के अनुसार, बांग्लादेश का पाकिस्तान की तरफ यह झुकाव भारत के खिलाफ एक 'रणनीतिक लीवर' (सौदा करने की ताकत) हासिल करने की कोशिश हो सकती है।
मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय से ही पाकिस्तान और ISI को बांग्लादेश में अपनी पैठ बढ़ाने का मौका मिला, जिसे मौजूदा सरकार भी रणनीतिक लाभ के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी सीमा और गहरे आर्थिक हित होने के कारण ढाका पूरी तरह भारत-विरोधी खेमे में नहीं जा सकता, लेकिन पाकिस्तान और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाकर वह नई दिल्ली पर अपनी शर्तों को मानने का दबाव जरूर बना सकता है।
भारत के लिए नई चुनौतियां
हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद पाकिस्तान ने खुद को बांग्लादेश के सैन्य और सुरक्षा परिदृश्य में एक मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित कर लिया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश के साथ आपसी हितों और पारस्परिकता पर आधारित "सकारात्मक और रचनात्मक" संबंध चाहता है।
हालांकि, भारत के पूर्वी पड़ोस में पाकिस्तान और ISI की यह बढ़ती मौजूदगी नई दिल्ली के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती पेश कर रही है।


