क्या है पिकैक्स माउंटेन? जहां बंकर बस्टर बम भी फेल; कैसे बना ईरान जंग का टर्निंग प्वाइंट, चर्चा तेज

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना ​​है कि ईरान ने अपने बचे हुए 900 पाउंड यूरेनियम स्टॉक को पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) में शिफ़्ट कर दिया है, जो धरती की बहुत गहराई में है और लगभग अभेद्य बंकर है।

क्या है पिकैक्स माउंटेन? जहां बंकर बस्टर बम भी फेल; कैसे बना ईरान जंग का टर्निंग प्वाइंट, चर्चा तेज

ईरान युद्ध का आज 14वां दिन है। इस बीच जंग विकराल रूप ले चुका है। इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान में 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान ने भी मिडिल-ईस्ट में कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस बीच वॉशिंगटन पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। युद्ध खत्म करने को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि इस युद्ध में उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक, ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता को रोकना है। इसके लिए अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए बंकर बस्टर बम गिराने की पूरी तैयारी कर रखी है। और इसके लिए पहली बार ब्रिटिश धरती का इस्तेमाल करने की तैयारी हो चुकी है।

इसके लिए अमेरिका ने तीन B‑1B लांसर बमवर्षक विमान ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर रेडी टू मूव तैनात कर रखा है। माना जा रहा है कि यह ब्रिटिश ठिकाने से ईरान पर अमेरिकी हमलों का पहला बड़ा मिशन हो सकता है। B-1B लांसर एक लंबी दूरी का स्ट्रेटेजिक बॉम्बर है जो बड़े पारंपरिक पेलोड ले जाने में सक्षम है। वहीं दूसरी ओर ईरान अपने 900 पाउंड से भी ज्यादा संवर्धित यूरेनियम को छिपाने और गुप्त रखने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

क्या है पिकैक्स माउंटेन?

अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना ​​है कि ईरान ने अपने बचे हुए 900 पाउंड यूरेनियम स्टॉक को पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) में शिफ़्ट कर दिया है, जो धरती की बहुत गहराई में है और लगभग अभेद्य बंकर है। पिकैक्स माउंटेन ईरान में स्थित एक अत्यंत गुप्त और गहरी भूमिगत परमाणु सुविधा है, जो नतान्ज़ (Natanz) परमाणु केंद्र के पास ज़ाग्रोस पर्वतमाला में बनी है। यह स्थान, जिसे कुह-ए कोलांग गाज़ ला (Kuh-e Kolang Gaz La) भी कहा जाता है, भारी निर्माण गतिविधियों और सुरंगों के कारण चर्चा में है, जहाँ यूरेनियम संवर्धन या सेंट्रीफ्यूज निर्माण होने का संदेह है। यहाँ चौबीसों घंटे वैज्ञानिक काम पर जुटे हैं। ऐसा माना जाता है कि यहाँ बंकर बस्टर बम भी काम नहीं कर पाएगा। ऐसे में जमीनी सेना भेज कर ही इसे बंद किया जा सकता है।

नतान्ज़ से लगभग 1.6 किमी दूर

यह स्थल नतान्ज़ से लगभग 1.6 किमी दूर स्थित है और ग्रेनाइट के पहाड़ के नीचे 100 मीटर तक गहरा हो सकता है। हालाँकि आधिकारिक तौर पर इस ठिकाने का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसका उपयोग यूरेनियम संवर्धन या उसके भंडारण के लिए किया जाता है। जून 2025 में अमेरिकी/इजरायली हमलों के बाद, यह स्थान ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण परमाणु गतिविधि केंद्र के रूप में उभरा है क्योंकि यह पुराने परमाणु स्थलों की तुलना में बहुत अधिक सुरक्षित और गहरा है। यहां पारंपरिक हथियारों से नष्ट नहीं हो सकता है। NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी खुफिया सूत्रों के अनुसार पिकैक्स माउंटेन नामक बंकर, एक पहाड़ के नीचे 330 फीट से भी ज़्यादा गहराई में स्थित है। यह उस फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र से भी ज़्यादा गहरा है, जिस पर पिछले साल अमेरिका ने हमला किया था।

Pickaxe Mountain

ईरान के पास अभी भी 60% संवर्धित यूरेनियम

बता दें कि पिछले साल गर्मियों में हुए 12-दिनों के युद्ध के दौरान, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर कई हवाई हमले किए थे। उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से तबाह हो चुका है लेकिन, ईरान ने तुरंत अपने ठिकानों को मज़बूत करना और यूरेनियम एनरिचमेंट की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना शुरू कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के पास अभी भी 60% तक एनरिच्ड 900 पाउंड से ज़्यादा यूरेनियम मौजूद है। यह यूरेनियम कम से कम 11 न्यूक्लियर बम बनाने से बस कुछ ही कदम दूर है। माना जाता है कि यह सामग्री ईरान के फ़ोर्डो एनरिचमेंट प्लांट और उसके इस्फ़हान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स के बीच फैली हुई है।

ईरान जंग का टर्निंग प्वाइंट

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल जब तक पिकैक्स माउंटेन नामक परमाणु ठिकानो को नेस्तनाबूद नहीं कर देता, तब तक इस जंग का मकसद और ट्रंप की ईरान को परमाणु क्षमता से मुक्त करने का संकल्प पूरा नहीं हो सकता। ऐसे में यह अभेद्द किला न सिर्फ अमेरिका के लिए सरदर्द बना हुआ है बल्कि ईरान जंग का टर्निंग प्वाइंट भी बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी पिछले साल स्वीकार किया था कि 60% शुद्धता वाले 409 किलोग्राम (लगभग 902 पाउंड) यूरेनियम का पता खो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई पूर्ण परमाणु हथियार बनाने का फैसला करते हैं, तो इतना यूरेनियम संभावित रूप से 11 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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