LGM-30G Minuteman III डूम्स्ड मिसाइल क्या, ईरान जंग के बीच US ने किया जिसका परीक्षण; क्या संदेश?
LGM-30G Minuteman III डूम्स्ड मिसाइल नॉर्थ कोरिया और चीन समेत ज़्यादा से ज़्यादा 13,000 KM (8,000 मील) की दूरी तक तीन अलग-अलग टारगेट किए गए Mk 12A न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकते हैं।

ईरान से अमेरिका और इजरायल के जंग के बीच अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण किया है। अमेरिकी सेना ने कैलिफोर्निया तट से एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) LGM-30G Minuteman III का परीक्षण किया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और परमाणु संतुलन को लेकर नई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष बल यानी यूएस स्पेस फोर्स ने बताया कि बिना हथियार वाली LGM-30G Minuteman III मिसाइल का 5 मार्च को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।
मिसाइल के दो री-एंट्री व्हीकल हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए प्रशांत महासागर में स्थित क्वाजालीन एटोल में निर्धारित लक्ष्य पर पहुंचे। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह परीक्षण कई वर्षों से निर्धारित था और इसे वर्तमान वैश्विक घटनाओं की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं किया गया।
क्या है LGM-30G Minuteman III मिसाइल?
LGM-30G Minuteman III एक अमेरिकी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसे अक्सर इसकी विनाशकारी क्षमता के कारण 'डूम्स्डे मिसाइल' (Doomsday Missile) कहा जाता है। यह अमेरिका की 'न्यूक्लियर ट्रायड' (Nuclear Triad) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जमीन से परमाणु हमला करने की क्षमता प्रदान करती है।
Minuteman III मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ:
यह मिसाइल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना अधिक शक्तिशाली परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता लगभग 6,000 मील (9,650+ किलोमीटर) से अधिक है। यानी यह दुनिया के किसी भी कोने में लक्ष्य को भेद सकती है।यह मिसाइल 15,000 मील प्रति घंटे (लगभग 24,000 किमी/घंटा) से अधिक की गति से उड़ान भर सकती है, जिससे इसे किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकना लगभग नामुमकिन है।
लगभग 13,000 किलोमीटर इसकी मारक क्षमता है। यह पहले तीन परमाणु वारहेड ले जा सकती थी। वर्तमान में हथियार नियंत्रण समझौते के कारण एक वारहेड तक इसकी क्षमता सीमित की गई है। यह मिसाइल अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में भूमिगत साइलो में तैनात रहती है और परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
अमेरिका के पास कितनी मिसाइलें हैं?
अमेरिका के पास फिलहाल लगभग 400 Minuteman-III मिसाइलें तैनात हैं, जो तीन प्रमुख मिसाइल विंग्स माल्मस्ट्रॉम एयर फोर्स बेस (मोंटाना), एफ.ई. वॉरेन एयर फोर्स बेस (व्योमिंग) और मिनोट एयर फोर्स बेस (नॉर्थ डकोटा) में रखी गई हैं।
क्यों किया गया परीक्षण?
अमेरिकी वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य मिसाइल प्रणाली के विभिन्न तकनीकी हिस्सों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना था। अमेरिकी रणनीतिक कमान के अधिकारियों ने कहा कि इस परीक्षण से यह सुनिश्चित किया जाता है कि अमेरिका की लंबी दूरी की मारक क्षमता केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि वास्तविक और विश्वसनीय सैन्य ताकत बनी रहे।
बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच क्या संकेत
हालांकि अमेरिका ने इसे नियमित परीक्षण बताया है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और परमाणु हथियारों की होड़ के बीच इस परीक्षण ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में ऐसे परीक्षण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बहस को और तेज कर सकते हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका का यह मिसाइल परीक्षण यह संकेत देता है कि वैश्विक शक्तियाँ अपनी रणनीतिक सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करने में लगी हुई हैं। इससे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु संतुलन पर असर पड़ सकता है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


