
क्या है डच बीमारी? जिसका शिकार हुआ वेनेजुएला, कभी था US का खास दोस्त, अब बना दुश्मन
वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनकर जनता के बीच मसीहा बने ह्यूगो चावेज ने 1998 सरकार का खजाना जनता के लिए खोल दिया। लेकिन यह फैसला गलत साबित हुआ। पहले से ही खस्ताहाल हो रहे उद्योग धंधे अब पूरी तरह से तबाह गए। पूरा देश तेल के निर्यात पर निर्भर हो गया।
वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति को उठाकर ले आए की घटना ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी हैं। लगातार ट्रंप की चेतावनियों का सामना कर रहे पूर्व वेनेजुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने शायद सोचा नहीं होगा कि अमेरिका एक दिन उन्हें उनके घर से ही उठा लेगा। हालांकि, ऐसा हुआ और इस वक्त मादुरो अपनी पत्नी के साथ न्यूयॉर्क की जेल में बंद हैं। कई विशेषज्ञों की मानें तो वेनेजुएला पर किए गए अमेरिकी हमले के पीछे कई वजहें हैं। कई लोग इसे ट्रंप द्वारा एपस्टीन फाइल्स से लोगों का ध्यान हटाना बताया, तो कई लोगों ने इसे वेनेजुएला में अमेरिका विरोधी देशों की बैठकों और वहां के तेल को वजह बताया। इसकी दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति का आरोप है कि मादुरो अमेरिका में ड्रग्स सप्लाई करते हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
वजह चाहे, जो भी हो लेकिन अब यह घटनाक्रम अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच में दुश्मनी को बढ़ाने वाला साबित हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप अब वहां की उपराष्ट्रपति या कार्यवाहक राष्ट्रपति और अन्य लोगों को धमकी दे रहे हैं। लेकिन सवाल यही है, आखिर इतने बड़े तेल भंडार और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर वेनेजुएला की यह स्थिति कैसे हो गई?
डच डिजीज की चपेट में आया वेनेजुएला
किसी भी इंसान के पास अगर जरूरत से ज्यादा पैसा आ जाता है, तो उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। ठीक ऐसी ही स्थिति किसी देश को लेकर भी हो सकती है। 1970 के दशक में नीदरलैंड में प्राकृतिक संसाधनों से आए पैसे की वजह से वहां की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई। इसके बाद ही डच डिजीज शब्द का प्रयोग किया जाने लगा।
डच डिजीज एक ऐसी आर्थिक स्थिति में जिसमें किसी देश को प्राकृतिक संसाधनों की दम पर बहुत ज्यादा आमदनी होने लगती है। विदेशी मुद्रा के भंडार से देश की मुद्रा मजबूत हो जाती है और उत्पादन के स्थान पर आयात आसान हो जाता है। यह आय इतनी ज्यादा होती है कि वहां के उद्योग धंधे पूरी तरह से चौपट हो जाते हैं।
अमेरिका का खास दोस्त वेनेजुएला
एक समय तक अमेरिका के सबसे करीबी और लैटिन अमेरिका में सबसे भरोसेमंद साथी माने जाने वाले वेनेजुएला में प्राकृतिक संसाधनों का अकूत भंडार शुरू से ही मौजूद था। तेल की दम पर वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत बनी रही। यह स्थिति इतनी मजबूत थी कि ज्यादातर उद्योग धंधे बंद हो गए, और स्थानीय खेती भी बर्बाद हो गई।
एक दौर में वेनेजुएला की 90 फीसदी अर्थव्यवस्ता तेल पर आकर टिक गई। तेल से होने वाली आमदनी से ही ज्यादातर आयात होने लगा। देश के बाकी सेक्टर भी तबाह हो गए। इस पूरे दौर में देश के अमीरों ने तो पैसे कमाए, लेकिन गरीब वर्ग बर्बाद हो गया।
ह्यूगो चावेज का उदय
वैश्विक मंदी के बाद तेल के निर्यात में आई कमी ने जनता को महंगाई के बोझ तले दबा दिया। हालात इतने खराब हो गए कि प्राकृतिक मामलों में समृद्ध वेनेजुएला में आम जनता भूखे मरने की नौबत पर आ गई। इसी बीच 1992 में वामपंथ का झंडा उठाए सेना के अफसर ह्यूगो चावेज ने सरकार का तख्ता पलट करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हुआ और चावेज को जेल में डाल दिया।
1998 तक आते-आते हालात और भी ज्यादा खराब हो गए। महंगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी और राजधानी कराकास के अलावा देश में जगह-जगह दंगे होने लगे। 1998 जेल से छूटने के बाद ह्यूगो चावेज वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। यहीं से वेनेजुएला और अमेरिका के बीच में तनातनी की शुरूआत हो गई।
अमेरिका का खुलकर विरोध करने वाले चावेज ने समाजवाद के प्रभाव में देश का खजाना जनता के लिए खोल दिया। लेकिन इस स्थिति ने आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेजुएला को सुधारने की जगह और भी ज्यादा परेशानी में डाल दिया। खाना, रहना, स्वास्थ्य सभी सुविधाओं का सरकार की तरफ से फ्री होने की वजह से चावेज तो मसीहा बन गए लेकिन पहले से ही तंगहाल देश के उद्योग धंधे और भी ज्यादा बर्बाद हो गए। 2013 में जब चावेज की मौत हुई, तब तक वेनेजुएला तेल को बेचकर अपने संकट को टालता रहा।
लेकिन 2013 में मादुरो के सत्ता में आने के साथ ही वेनेजुएला के उल्टे दिन शुरू हो गए। इस समय पर तेल की कीमतों में भारी गिरावट हुई। ड्रग्स तस्करी का आरोप लगा अमेरिका ने भी वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगा दिए।
भारी महंगाई और खाने-पीने दवाई की कमी की वजह से लाखों लोग देश छोड़कर भाग गए। यह लोग गैर-कानूनी तरीकों से अमेरिका में जाने लगे, जिसकी वजह से अमेरिका को भी वेनेजुएला में हस्तक्षेप करने की वजह मिल गई। ड्र्ग तस्करी का आरोप लगा, न्यूयॉर्क की अदालत ने मादुरो के खिलाफ केस शुरू कर दिया। इसी केस के आधार पर ट्रंप ने 2026 की शुरुआत में मादुरो को उनके घर से उठा लिया।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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