2027 तक बंद क्यों हो रहा है दुबई की शान बुर्ज अल अरब होटल? ईरान जंग से क्या कनेक्शन

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, दुबई
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बुर्ज अल अरब दुनिया का एकमात्र सात स्टार अल्ट्रा-लक्ज़री होटल है, जो जहाज के पाल जैसी अनूठी संरचना और कृत्रिम द्वीप पर स्थित होने के लिए प्रसिद्ध है। यह समुद्र तट से 280 मीटर की दूरी पर स्थित है।

2027 तक बंद क्यों हो रहा है दुबई की शान बुर्ज अल अरब होटल? ईरान जंग से क्या कनेक्शन

दुबई का प्रतिष्ठित और आलीशान होटल बुर्ज अल अरब (Burj Al Arab) बंद होने जा रहा है। जरा ठहरिए... यह होटल हमेशा के लिए बंद नहीं हो रहा है, बल्कि यह 18 महीने के लिए एक बड़े रिनोवेशन (नवीनीकरण) प्रोजेक्ट के लिए अस्थायी रूप से बंद हो रहा है। इसके ऑपरेटर जुमेराह ग्रुप ने कहा है कि 25 साल से अधिक समय तक पूरी दुनिया की सेवा करने के बाद इसे और अधिक आधुनिक, लग्जरी और टेक-फ्रेंडली बनाने के लिए यह रणनीतिक फैसला लिया गया है। जुमेराह ग्रुप ने 15 अप्रैल को इस बड़े रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट की घोषणा की।

बता दें कि मिडिल-ईस्ट में छिड़ी जंग के दौरान यह होटल चर्चा में रहा है क्योंकि जंग के बीच ड्रोन के मलबे से इस होटल को मामूली नुकसान हुआ है। हालांकि, इसे 18 महीने के लिए अस्थाई तौर पर इसे बंद करने का यह फैसला हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में दुनिया के लीडर के तौर पर इसकी हैसियत को बनाए रखने के लिए एक सोची-समझी रणनीति है।

बुर्ज अल अरब क्या है?

एक कृत्रिम द्वीप पर खड़ा यह सात सितारा होटल बुर्ज अल अरब समंदर के बीच अपनी पाल जैसी बनावट की वजह से न सिर्फ एक उन्नत वास्तुकला का नायाब नमूना है बल्कि यह 'शान-शौकत' का एक वैश्विक प्रतीक भी है। यह दुबई की स्काईलाइन का भी एक प्रमुख प्रतीक रहा है। रिनोवेशन प्रोजेक्ट के तहत होटल के इंटीरियर को नया रूप दिया जाएगा, लेकिन इसकी मूल पहचान और डिजाइन को बरकरार रखा जाएगा। जुमेराह ग्रुप ने इसे एक कला कृति की तरह सावधानी से बहाल करने की प्रक्रिया बताया है। इस बड़े रीडिज़ाइन की कमान मशहूर फ़्रेंच इंटीरियर आर्किटेक्ट ट्रिस्टन ऑयर को सौंपी गई है, जो होटल डी क्रिलॉन जैसी मशहूर जगहों पर अपने काम के लिए जाने जाते हैं।

बुर्ज अल अरब होटल की खूबियां क्या?

बुर्ज अल अरब दुनिया का एकमात्र सात स्टार अल्ट्रा-लक्ज़री होटल है, जो जहाज के पाल जैसी अनूठी संरचना और कृत्रिम द्वीप पर स्थित होने के लिए प्रसिद्ध है। यह समुद्र तट से 280 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ 202 डुप्लेक्स सुइट्स हैं, जहाँ व्यक्तिगत बटलर सेवा मिलती है। यह होटल समुद्र के अद्भुत दृश्यों, विश्व स्तरीय डाइनिंग और अपनी शानदार मेहमाननवाज़ी के लिए विश्व भर में मशहूर है। यहाँ 202 शानदार डुप्लेक्स सुइट्स हैं, जिनमें से प्रत्येक में 24-कैरेट सोने का काम और शानदार इंटीरियर उपलब्ध हैं।

इस होटल में हर मेहमान के लिए एक पर्सनल बटलर 24 घंटे सेवा में उपलब्ध रहती है। होटल के अंदर, लॉबी से लेकर सुइट्स तक, हर जगह सोने की पत्ती का उपयोग किया गया है। छत पर एक प्रसिद्ध हेलिपैड है, जहाँ से शहर का खूबसूरत नजारा दिखता है। इस होटल में कई विश्व-प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स हैं, जैसे कि 'अल महारा' जो एक विशाल एक्वेरियम के साथ समुद्र के अंदर का अनुभव देता है।

होटल किसने बनवाया?

1990 के दशक की शुरुआत में, शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम एक ऐसी यादगार इमारत बनाना चाहते थे, जो दुबई के लिए वही काम करे जो पेरिस के लिए एफ़िल टावर या ऑस्ट्रेलिया के लिए सिडनी ओपेरा हाउस कर रहा था। इसी जरूरत के लिहाज से फारस की खाड़ी में दुबई सरकार (दुबई होल्डिंग के माध्यम से) ने इस होटल का निर्माण करवाया गया था। इसका निर्माण 1994 में शुरू हुआ और यह 1 दिसंबर 1999 को जनता के लिए खोला गया। इस आलीशान होटल को मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीकी निर्माण कंपनी मरे एंड रॉबर्ट्स (अब कॉनकोर) और अल हबटूर इंजीनियरिंग ने बनाया था। इस इमारत का मकसद दुबई की समुद्री विरासत को दिखाना था, साथ ही यह तेल से समृद्ध और तेल के बाद के भविष्य की ओर भी इशारा करती थी। जब 1999 में यह खुला, तो इस होटल ने शहर के स्काईलाइन को एक नई पहचान दी; जो विज्ञापन अभियानों से लेकर एयरलाइन मार्गों तक, हर जगह "नए दुबई" का पर्याय बन गई।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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